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आजमगढ़ में आवारा कुत्तों पर सख्ती, स्कूलों में ‘माट साहब’ बने कुत्ता भगाने के नोडल अधिकारी

Published on: December 29, 2025
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जागृत भारत | आजमगढ़(Azamgarh): जिले में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक पर लगाम लगाने के लिए शासन ने सख्त आदेश जारी कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में अब सभी सरकारी और निजी स्कूलों, अस्पतालों और सार्वजनिक परिसरों को आवारा कुत्तों से मुक्त कराने की जिम्मेदारी तय की गई है। इस आदेश के तहत स्कूल परिसरों में एक नोडल अध्यापक की नियुक्ति अनिवार्य कर दी गई है।


नोडल अध्यापक को सौंपी गई अहम जिम्मेदारी

शासनादेश के अनुसार, प्रत्येक स्कूल में तैनात किसी एक शिक्षक को नोडल अध्यापक बनाया जाएगा। यह अध्यापक स्कूल परिसर को पूरी तरह आवारा कुत्तों से मुक्त रखने का जिम्मेदार होगा। यदि किसी छात्र को कुत्ते के काटने की घटना होती है, तो नोडल अध्यापक छात्र को तत्काल अस्पताल ले जाकर रैबीज का टीका लगवाने की जिम्मेदारी भी निभाएगा।


असुरक्षित स्कूलों की बनेगी सूची

नगर निकाय और विकास प्राधिकरण द्वारा उन स्कूल परिसरों की पहचान की जाएगी, जो आवारा कुत्तों के लिहाज से असुरक्षित हैं। ऐसे सभी स्कूलों की सूची तैयार कर शासन को भेजी जाएगी, ताकि आवश्यक कदम उठाए जा सकें और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।


बेसिक शिक्षा अधिकारियों को जारी हुए निर्देश

शिक्षा निदेशक (बेसिक) ने प्रदेश के सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं। नगर निकाय के साथ समन्वय बनाकर स्कूल परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा और किसी भी तरह की लापरवाही पर कार्रवाई की जा सकती है।


अधिकारियों ने क्या कहा

राजीव कुमार पाठक, बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बताया कि शिक्षा निदेशक (बेसिक) का आदेश प्राप्त हो चुका है। स्कूल में तैनात किसी एक शिक्षक को नोडल बनाया जाएगा, जिसकी जिम्मेदारी स्कूल परिसर को आवारा कुत्तों से मुक्त कराना होगी।

वहीं प्रियंका सिंह, एसडीएम न्यायिक व प्रभारी ईओ नगर पालिका ने कहा कि शासनादेश के अनुपालन में बेसिक शिक्षा अधिकारी से बातचीत हो चुकी है। असुरक्षित स्कूलों की पहचान कर सूची शासन को भेजी जाएगी।


छात्रों की सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम

इस निर्णय से न केवल छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि स्कूलों का वातावरण भी सुरक्षित और स्वास्थ्यपूर्ण बनेगा। प्रशासन का मानना है कि यह कदम बच्चों की भलाई और शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक अहम सुधार साबित होगा।

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