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जेल में ठिठुरते हुए गुज़री पूर्व IPS अमिताभ ठाकुर की पहली रात: तीन कंबल में कटाई सर्द रात, जमीन पर बिछाकर सोना पड़ा; कभी इसी जेल का निरीक्षण किया करते थे

Published on: December 12, 2025
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जागृत भारत | देवरिया में औद्योगिक प्लॉट की खरीद–फरोख्त से जुड़े जालसाजी मामले में गिरफ्तार किए गए यूपी के पूर्व IPS अधिकारी अमिताभ ठाकुर की जेल में पहली रात काफी कठिन रही। उन्हें किसी भी तरह का वीआईपी ट्रीटमेंट नहीं दिया गया और पूरी तरह से आम बंदियों जैसा व्यवहार किया गया।

जमीन पर सोकर गुजारी रात

भीषण ठंड के बावजूद उन्हें नियमों के अनुसार केवल तीन कंबल उपलब्ध कराए गए। न तो बिस्तर दिया गया, न तकिया, और न ही कोई विशेष सुविधा। दो कंबल जमीन पर बिछाकर और एक ओढ़कर उन्हें रात गुजारनी पड़ी। ठंड के कारण पूरी रात वे बेचैनी में रहे।

निरीक्षण की गई वही जेल, अब बनी ठिकाना

गौरतलब है कि 1998 से 2000 के बीच अमिताभ ठाकुर देवरिया के एसपी रहे थे और इसी जेल का कई बार निरीक्षण भी कर चुके थे। आज वही जेल उनके लिए बंदीगृह बन गई है। जेल की संरचना, गेट सिस्टम और सुरक्षा व्यवस्था की गहरी जानकारी होने के कारण जेल प्रशासन उनकी गतिविधियों पर खास नजर रखे हुए है।

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शाहजहांपुर स्टेशन से हुई गिरफ्तारी

पूर्व IPS को लखनऊ पुलिस ने 26 साल पुराने केस में बुधवार को शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया था। वे लखनऊ एसी सुपरफास्ट ट्रेन से सफर कर रहे थे, तभी सादी वर्दी में मौजूद पुलिस ने ट्रेन के रुकते ही उन्हें हिरासत में ले लिया। पूछताछ और मेडिकल जांच के बाद उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया।

अस्पताल से हाई सिक्योरिटी बैरक में शिफ्ट

पहली रात अमिताभ ठाकुर को जेल अस्पताल में रखा गया था, लेकिन गुरुवार दोपहर उन्हें जिला जेल की हाई सिक्योरिटी बैरक में ट्रांसफर कर दिया गया।

सीमित भोजन, सुबह हल्का नाश्ता

सूत्रों के मुताबिक गुरुवार रात उन्हें हरी सब्जी, दाल और दो रोटियां दी गई थीं, जिनमें से वे सिर्फ एक रोटी ही खा सके। सुबह चाय और चना मिला, जिसके बाद उन्होंने नियमित दिनचर्या पूरी की।

जेल व्यवस्था पर लगातार लिख रहे नोट्स

हाई सिक्योरिटी बैरक में शिफ्ट होने के बाद से ही वे जेल की व्यवस्थाओं पर लगातार नोट्स तैयार कर रहे हैं। उन्होंने जेल प्रशासन से 50–60 ए4 शीट और पेन मांगा है। आशंका है कि वे जेल की खामियों, सुरक्षा व्यवस्था और सुविधाओं की कमी पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेज सकते हैं। जेल अधिकारियों का कहना है कि उनका प्रशासनिक अनुभव और लेखन क्षमता उन्हें एक संवेदनशील बंदी बनाती है।

जेल प्रशासन का बयान

जेल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सभी सुविधाएं मैनुअल के अनुसार दी जा रही हैं। किसी भी तरह का वीआईपी ट्रीटमेंट नहीं दिया जा रहा और न ही बाहर से सामान लाने की अनुमति है।


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