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कनेर की फली ने छीनी तीन मासूम जिंदगियां: मानवाधिकार आयोग ने मांगी रिपोर्ट, मुआवजे की उठी मांग; 17 फरवरी को होगी सुनवाई

Published on: January 10, 2026
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जागृत भारत | वाराणसी(Varanasi): जिले के मिर्जामुराद थाना क्षेत्र के करधना गांव में कनेर की फली खाने से तीन मासूम बच्चियों की मौत के मामले में अब राज्य मानवाधिकार आयोग ने गंभीर रुख अपनाया है। आयोग ने इस घटना को मानवाधिकार उल्लंघन की श्रेणी में मानते हुए जिलाधिकारी से विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है।

मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं चंदौली निवासी अधिवक्ता खालिद वकार आबिद ने इस मामले में आयोग से शिकायत की थी। उन्होंने प्रशासनिक लापरवाही, जन-जागरूकता की भारी कमी और बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था की विफलता पर सवाल उठाते हुए पीड़ित परिवारों को तत्काल मुआवजा देने की मांग की है।

8 जनवरी को जारी हुआ आयोग का आदेश

शिकायत पर संज्ञान लेते हुए राज्य मानवाधिकार आयोग ने 8 जनवरी 2026 को आदेश जारी किया। इसमें जिलाधिकारी को निर्देश दिया गया है कि वह जांच प्रक्रिया में शिकायतकर्ता अधिवक्ता खालिद वकार आबिद को सम्मिलित करें। आयोग ने 16 फरवरी 2026 तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश दिया है, जबकि मामले की अगली सुनवाई 17 फरवरी 2026 को आयोग के समक्ष निर्धारित की गई है।


24 घंटे में तीन बच्चियों की दर्दनाक मौत, गांव में पसरा मातम

पूरा मामला वाराणसी जिले के करधना गांव का है, जहां बीते रविवार और सोमवार को महज 24 घंटे के भीतर तीन बच्चियों की मौत हो गई। मृत बच्चियों में मिथलेश प्रजापति की बेटियां हर्षिता (6) और अंशिका (3) तथा उनके पड़ोसी मनीष प्रजापति की बेटी नैंसी (4) शामिल हैं।

परिजनों के अनुसार, गांव के ही कुछ बच्चे रविवार की सुबह घर से थोड़ी दूरी पर खेल रहे थे। खेलते-खेलते बच्चों को वहां कनेर का पेड़ और उसकी फलियां दिखीं। आंवला समझकर नैंसी, हर्षिता और अंशिका ने कनेर की फली का बीज खा लिया, जबकि अन्य बच्चों ने उसे नहीं खाया।

तबीयत बिगड़ी, एक-एक कर बुझ गईं तीन जिंदगियां

बीज खाने के कुछ देर बाद तीनों बच्चियों को पेट दर्द शुरू हो गया और वे अपने-अपने घर लौट गईं। रविवार की शाम सबसे पहले हर्षिता की हालत गंभीर हुई। परिजन उसे आनन-फानन में एक निजी अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

परिजन इस सदमे से उबर भी नहीं पाए थे कि सोमवार की सुबह अंशिका की तबीयत बिगड़ गई। उसे भी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन सोमवार दोपहर इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई। एक ही परिवार की दो बेटियों की मौत से पूरे गांव में कोहराम मच गया।

बीएचयू ट्रॉमा सेंटर में नैंसी ने तोड़ा दम

इसी बीच नैंसी की भी हालत बिगड़ने लगी। परिजन उसे तत्काल बीएचयू ट्रॉमा सेंटर ले गए, जहां इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई। तीन मासूम बच्चियों की मौत से गांव में शोक की लहर फैल गई। दो दिन तक दोनों परिवारों के घरों में चूल्हे तक नहीं जले


पुलिस कार्रवाई और प्रशासनिक जांच

शुरुआत में हर्षिता और अंशिका का दाह संस्कार पुलिस को सूचना दिए बिना कर दिया गया था। नैंसी की मौत के बाद मिर्जामुराद थाना पुलिस ने उसका शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया

परिजनों ने पुलिस को बताया कि बच्चियों ने आंवला समझकर कनेर का जहरीला बीज खाया था। जिस स्थान से बच्चियों ने बीज खाया था, वहां मौजूद कनेर के पेड़ को परिजनों ने उखाड़कर फेंक दिया

घटना की सूचना पर मिर्जामुराद थाने की पुलिस, गोमती जोन के एडीसीपी वैभव बांगर और नायब तहसीलदार दीपाली मौर्य भी गांव पहुंचे और पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर पूरी घटना की जानकारी ली।


जन-जागरूकता और बाल सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

मानवाधिकार कार्यकर्ता खालिद वकार आबिद का कहना है कि यदि जहरीले पौधों को लेकर समय रहते जागरूकता अभियान चलाया गया होता, तो यह दर्दनाक हादसा टल सकता था। उन्होंने इसे प्रशासनिक लापरवाही और बच्चों की सुरक्षा में गंभीर चूक करार दिया है।

अब पूरे मामले पर राज्य मानवाधिकार आयोग की सुनवाई और जिलाधिकारी की रिपोर्ट पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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