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FCRA संशोधन पर फिर गरमाई बहस, विदेशी ईसाई संगठनों ने जताई चिंता; सरकार बोली- उद्देश्य सिर्फ पारदर्शिता

Published on: August 4, 2026
Heated debate reignites over FCRA amendment

जागृत भारत,वॉशिंगटन/नई दिल्ली : भारत सरकार विदेशी फंडिंग से जुड़े कानून फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट (FCRA) में संशोधन की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित संशोधन विधेयक को संसद में दोबारा पेश किए जाने की संभावना के बीच कई अंतरराष्ट्रीय ईसाई संगठनों ने इस पर चिंता जताई है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार का कहना है कि प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य केवल विदेशी चंदे की निगरानी को मजबूत करना और फंड के दुरुपयोग पर रोक लगाना है। FCRA संशोधन विधेयक पहली बार 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था, लेकिन विपक्ष और कुछ नागरिक संगठनों के विरोध के बाद इसे आगे नहीं बढ़ाया गया। अब इसे फिर से संसद में लाए जाने की चर्चा है।

क्या हैं ईसाई संगठनों की चिंताएं?

अमेरिका स्थित संगठन इंटरनेशनल क्रिश्चियन कंसर्न (ICC) सहित कई अंतरराष्ट्रीय ईसाई समूहों का आरोप है कि प्रस्तावित संशोधन से सरकार को विदेशी फंड प्राप्त करने वाले गैर-सरकारी संगठनों (NGO) पर अधिक अधिकार मिल सकते हैं। उनका कहना है कि इससे विदेशी सहायता पर निर्भर चर्च, स्कूल, अस्पताल और चैरिटेबल संस्थानों के संचालन पर असर पड़ सकता है।

ICC ने दावा किया है कि नए प्रावधानों के लागू होने पर संगठनों के लिए FCRA पंजीकरण बनाए रखना अधिक कठिन हो सकता है, जिससे उनकी विदेशी वित्तीय सहायता प्राप्त करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

सरकार का पक्ष

केंद्र सरकार का कहना है कि प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य किसी विशेष समुदाय या संस्था को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि विदेशी फंडिंग व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। सरकार का तर्क है कि यह कदम विदेशी धन के संभावित दुरुपयोग को रोकने और नियामकीय व्यवस्था को मजबूत करने के लिए उठाया जा रहा है।

धर्मांतरण के आरोपों का भी जिक्र

ICC ने अपने बयान में कहा है कि भारत में कुछ ईसाई संगठनों पर धर्मार्थ गतिविधियों की आड़ में धर्मांतरण कराने के आरोप लगाए जाते हैं। संगठन का दावा है कि इन आरोपों का उपयोग वैध सामाजिक और मानव सेवा कार्यों को प्रभावित करने के लिए किया जाता है। वहीं, भारत में कई राज्य सरकारें और केंद्रीय एजेंसियां समय-समय पर यह कहती रही हैं कि कानून का उद्देश्य केवल अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई करना है।

USCIRF रिपोर्ट का भी उल्लेख

ICC ने अपने बयान में अमेरिकी संस्था यूएस कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (USCIRF) की रिपोर्टों का भी हवाला दिया है। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार पहले भी USCIRF की रिपोर्टों को पक्षपातपूर्ण और तथ्यहीन बताते हुए खारिज कर चुकी है। नई दिल्ली का कहना रहा है कि ऐसी टिप्पणियां भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने का प्रयास हैं।

संसद में बहस पर रहेगी नजर

यदि FCRA संशोधन विधेयक संसद में पेश किया जाता है, तो इस पर सरकार और विपक्ष के बीच व्यापक बहस होने की संभावना है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय संगठनों की प्रतिक्रियाओं के बीच यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चा का केंद्र बन सकता है।



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