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बांकीपुर उपचुनाव: प्रशांत किशोर की नई रणनीति से बढ़ी सियासी हलचल, नीतीश कुमार के मुद्दे पर साध रहे निशाना

Published on: July 5, 2026
Bankipur By-election Prashant Kishor

जागृत भारत,पटना : बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने चुनाव प्रचार में पूरी ताकत झोंक दी है। उनके भाषणों और चुनावी रणनीति ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रशांत किशोर इस चुनाव में ऐसे मुद्दों को सामने ला रहे हैं, जो एनडीए, खासकर भाजपा के लिए चुनौती बन सकते हैं।

चुनाव प्रचार में नीतीश कुमार का बार-बार जिक्र

प्रचार के दौरान प्रशांत किशोर लगातार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल और उनकी वर्तमान राजनीतिक स्थिति का उल्लेख कर रहे हैं। वह जनता से सवाल पूछते हैं कि क्या वे नीतीश कुमार को मौजूदा हालात में देखना चाहते हैं। साथ ही वे शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास के पुराने दावों की तुलना वर्तमान व्यवस्था से करते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं।

प्रशांत किशोर का आरोप है कि जब नीतीश कुमार राजनीतिक रूप से कमजोर हुए, तब उनके आसपास के नेताओं ने उनके राजनीतिक प्रभाव को कमजोर कर दिया। इसी मुद्दे के जरिए वह मौजूदा सत्ता व्यवस्था पर निशाना साध रहे हैं।

नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद हो रहा उपचुनाव

बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव भाजपा नेता नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद खाली हुई सीट के कारण कराया जा रहा है। इस सीट को लेकर सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।

जातीय समीकरण पर भी नजर

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में कायस्थ, सवर्ण, वैश्य, मुस्लिम, यादव और कुर्मी मतदाता चुनावी परिणाम तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि प्रशांत किशोर इन सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। हाल के कुछ घटनाक्रमों के बाद कुर्मी और सवर्ण समुदाय के एक वर्ग में असंतोष की चर्चा भी राजनीतिक हलकों में रही है। इसी संदर्भ में प्रशांत किशोर पहले भरत तिवारी के गांव जाकर उनके परिजनों से मुलाकात भी कर चुके हैं।

चुनावी रणनीति पर टिकी निगाहें

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि प्रशांत किशोर अपनी रणनीति के अनुरूप विभिन्न सामाजिक वर्गों का समर्थन जुटाने में सफल रहते हैं, तो बांकीपुर उपचुनाव राज्य की राजनीति में नए राजनीतिक संकेत दे सकता है। हालांकि, इसका वास्तविक असर मतदान और मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल बांकीपुर का उपचुनाव बिहार की राजनीति का सबसे चर्चित मुकाबला बनता जा रहा है, जहां सभी दल अपने-अपने समीकरण साधने में जुटे हैं।


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