जागृत भारत,बीजिंग : बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान का चीन पहुंचने पर भव्य स्वागत किया गया है। रेड कार्पेट और उच्चस्तरीय स्वागत समारोह के जरिए बीजिंग ने ढाका के साथ अपने मजबूत होते संबंधों का स्पष्ट संदेश दिया है। माना जा रहा है कि यह दौरा चीन और बांग्लादेश के बीच आर्थिक, राजनीतिक और रणनीतिक सहयोग को नई गति दे सकता है, जिसका असर क्षेत्रीय समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
फरवरी में प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद तारिक रहमान के पहले आधिकारिक विदेश दौरे का यह दूसरा चरण है। चीन पहुंचने से पहले उन्होंने मलेशिया का दौरा किया, जहां प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ द्विपक्षीय वार्ता हुई और एक समझौता ज्ञापन (MoU) सहित कई सहयोगी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए गए।
चीन के डालियान झोउशुइज़ी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर तारिक रहमान और उनके प्रतिनिधिमंडल का स्वागत दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने किया। स्वागत करने वालों में लियाओनिंग प्रांत के उप-गवर्नर बाई यिंग, बांग्लादेश में चीन के राजदूत याओ वेन और चीन में बांग्लादेश के राजदूत मोहम्मद नजमुल इस्लाम शामिल थे।
अपने दौरे के दौरान रहमान विश्व आर्थिक मंच (WEF) की ‘न्यू चैंपियंस की 17वीं वार्षिक बैठक’, जिसे ‘समर दावोस फोरम’ भी कहा जाता है, में भाग लेंगे। इस दौरान उनके वैश्विक राजनीतिक और कारोबारी नेताओं से मुलाकात करने तथा जलवायु नेतृत्व और वैश्विक चुनौतियों से जुड़े सत्रों में हिस्सा लेने की उम्मीद है।
दौरे के सबसे महत्वपूर्ण पड़ावों में 26 जून को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ प्रस्तावित बैठक शामिल है। बांग्लादेश के विदेश सचिव असद आलम सियाम के अनुसार, इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच 15 से 17 द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। तीस्ता नदी परियोजना समेत कई महत्वपूर्ण विकास और निवेश योजनाओं पर भी चर्चा होने की संभावना है।
रिपोर्टों के अनुसार, बांग्लादेश इस दौरे में चीन से अतिरिक्त वित्तीय सहयोग और निवेश आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है। हाल ही में ढाका ने चटगांव में चीनी आर्थिक और औद्योगिक क्षेत्र के लिए करीब 340 मिलियन डॉलर की बुनियादी ढांचा परियोजना को मंजूरी दी है, जिसे चीन की रियायती फंडिंग का समर्थन प्राप्त है।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन और बांग्लादेश के रिश्ते एक नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं। ऐसे समय में दोनों देशों के बीच बढ़ती नजदीकियां दक्षिण एशिया की रणनीतिक राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे सकती हैं। हालांकि, क्षेत्रीय संतुलन और भारत-बांग्लादेश संबंधों के व्यापक संदर्भ में इन घटनाक्रमों पर सभी की नजर बनी हुई है।
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