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यूजीसी रेगुलेशन-2026 पर अखिलेश का बड़ा बयान, बोले– भाजपा की रणनीति, संस्थानों पर गैर-पीडीए का कब्जा

Published on: January 28, 2026
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जागृत भारत | लखनऊ(Lucknow): विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए विनियम-2026 को लेकर सियासी और शैक्षणिक हलकों में विवाद गहराता जा रहा है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इन नियमों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दोषियों को सजा मिलनी चाहिए और निर्दोषों को नहीं फंसना चाहिए, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में ऐसा होना मुश्किल है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह भाजपा की सोची-समझी रणनीति है और इन नियमों से पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज को कोई वास्तविक राहत नहीं मिलेगी। अखिलेश यादव ने कहा कि अधिकांश शैक्षणिक संस्थानों में गैर-पीडीए वर्ग के लोग पहले से काबिज हैं, जिससे समानता का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है।

लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रों का प्रदर्शन

यूजीसी की नई गाइडलाइन के खिलाफ लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रों का आक्रोश खुलकर सामने आया। मंगलवार को सैकड़ों छात्रों ने गेट नंबर-1 पर धरना-प्रदर्शन किया और नियमों को विभाजनकारी बताते हुए तत्काल वापस लेने की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने “यूजीसी रोल बैक” के नारे लगाए और चेतावनी दी कि यदि सरकार ने फैसला वापस नहीं लिया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। स्थिति को देखते हुए विश्वविद्यालय परिसर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। छात्रों ने एसीपी को ज्ञापन सौंपकर नई गाइडलाइन निरस्त करने की मांग की।

छात्र संगठनों के अलग-अलग सुर

एबीवीपी छात्र नेता उज्ज्वल त्रिपाठी ने कहा कि विश्वविद्यालय और कॉलेज समानता के केंद्र होते हैं, जहां अलग-अलग पृष्ठभूमि के छात्र एक साझा पहचान के साथ पढ़ते हैं। उनका कहना है कि नया नियम छात्रों को जातीय आधार पर बांटने का प्रयास है।

वहीं, एबीवीपी नेता आलोक मिश्रा ने आशंका जताई कि कानून का दुरुपयोग कर झूठे आरोप लगाए जा सकते हैं, जिससे शिक्षकों और छात्रों की प्रतिष्ठा और मानसिक स्थिति प्रभावित होगी।

दलित, ओबीसी और अन्य वर्गों के छात्र भी विरोध में

कुछ दलित और ओबीसी छात्रों ने भी नए नियमों को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह गाइडलाइन सामाजिक ताने-बाने को कमजोर कर सकती है और छात्रों के बीच भय व अविश्वास का माहौल पैदा कर सकती है।

यूजीसी के नए नियमों के प्रमुख प्रावधान

यूजीसी ने 13 जनवरी को “प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशन-2026” अधिसूचित किया है। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव रोकना है।

नए नियमों के तहत:

  • हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में इक्वल अपॉर्च्युनिटी सेंटर और इक्वलिटी स्क्वाड का गठन अनिवार्य होगा।

  • शिकायत मिलने पर 24 घंटे के भीतर बैठक और तय समय सीमा में कार्रवाई जरूरी होगी।

  • भेदभाव से जुड़े मामलों की वार्षिक रिपोर्ट यूजीसी को भेजनी होगी।

  • नियम उल्लंघन पर अनुदान रोकने, पाठ्यक्रम बंद करने और गंभीर मामलों में मान्यता रद्द करने का प्रावधान होगा।

छात्र दो गुटों में बंटे, बढ़ा विवाद

यूजीसी के नए नियमों को लेकर छात्र संगठनों और विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच मतभेद गहराते जा रहे हैं। कुछ छात्र संगठनों ने नियमों का समर्थन किया है, जबकि अन्य इसे समाज को विभाजित करने वाला कानून बता रहे हैं।

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