जागृत भारत,प्रयागराज : उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी (सपा) में संभावित टूट को लेकर जारी अटकलों के बीच उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने मंत्री ओम प्रकाश राजभर के दावों से खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भाजपा को समाजवादी पार्टी के सांसदों या नेताओं की कोई आवश्यकता नहीं है और पार्टी अपने कार्यकर्ताओं के दम पर मजबूत है।
शनिवार को प्रयागराज में मीडिया से बातचीत करते हुए मौर्य ने कहा कि भाजपा के पास समर्पित और संघर्षशील कार्यकर्ताओं की लंबी फौज है। उन्होंने सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा को किसी अन्य दल के नेताओं को शामिल करने की जरूरत नहीं है।
राजभर के दावों से बनाई दूरी
पिछले कुछ दिनों से कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर लगातार दावा कर रहे हैं कि समाजवादी पार्टी में बड़ी टूट होने वाली है और उसके कई सांसद भाजपा में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि सपा के वरिष्ठ नेता रामगोपाल यादव ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को कुछ सांसदों के भाजपा में शामिल होने संबंधी संदेश दिया है।
हालांकि, इन दावों की अब तक किसी स्वतंत्र स्रोत या संबंधित दलों द्वारा पुष्टि नहीं की गई है।
दिलचस्प बात यह है कि कुछ दिन पहले स्वयं केशव मौर्य ने भी दावा किया था कि सपा के कई सांसद भाजपा में आने के इच्छुक हैं। लेकिन अब उन्होंने राजभर के दावों को महत्व देने से इनकार कर दिया है।
करणी सेना प्रमुख के बयान पर भी प्रतिक्रिया
उपमुख्यमंत्री ने करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरजपाल सिंह अम्मू द्वारा की गई टिप्पणी पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कुछ लोग बिना सोच-विचार के बयान देते हैं और ऐसे बयानों को गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है।
दरअसल, अलीगढ़ में एक कार्यक्रम के दौरान अम्मू ने प्रदेश की सड़कों की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए उनकी तुलना केशव मौर्य के गालों से कर दी थी। यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
कैसे शुरू हुआ सपा में टूट का विवाद?
सपा में संभावित टूट की चर्चा तब शुरू हुई जब ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया कि महाराष्ट्र के बाद अब उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। उन्होंने कहा कि सपा के कई सांसद भाजपा के संपर्क में हैं और जल्द ही राजनीतिक घटनाक्रम सामने आ सकते हैं।
इसके जवाब में समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा कि भविष्यवाणी करने वालों को पहले अपनी राजनीतिक स्थिति और भविष्य की चिंता करनी चाहिए। अखिलेश की टिप्पणी के बाद राजभर ने भी पलटवार करते हुए कहा कि सपा के भीतर असंतोष बढ़ रहा है और पार्टी नेतृत्व को अपनी राजनीतिक चुनौतियों पर ध्यान देना चाहिए।
मानसून सत्र से पहले बड़े बदलाव का दावा
राजभर ने दावा किया है कि लोकसभा के मानसून सत्र से पहले पूर्वांचल के कई सांसद सपा छोड़ सकते हैं। उनका कहना है कि पार्टी नेतृत्व को भी इस स्थिति का अंदाजा है, इसलिए हाल के दिनों में पार्टी के भीतर अनुशासन और निष्ठा को लेकर बयान दिए जा रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि पार्टी में कोई बड़ा राजनीतिक बदलाव होता है तो संगठन को संभालने में शिवपाल यादव की भूमिका अहम हो सकती है।
अभी तक नहीं मिली आधिकारिक पुष्टि
हालांकि, अब तक समाजवादी पार्टी के किसी सांसद ने सार्वजनिक रूप से पार्टी छोड़ने की घोषणा नहीं की है। वहीं भाजपा की ओर से भी किसी संभावित शामिल होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में दावों और जवाबी दावों का दौर जारी है, लेकिन वास्तविक स्थिति पर अभी स्पष्टता नहीं है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी महीनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में होने वाले घटनाक्रम इस मुद्दे की दिशा तय करेंगे।
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