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देवरिया में बाल श्रम मुक्त जिला बनाने की दिशा में पहल, नागरिकों से सहयोग की अपील

Published on: December 11, 2025
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जागृत भारत | देवरिया: सहायक श्रमायुक्त स्कन्द कुमार ने बताया कि उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशानुसार प्रदेश को वर्ष 2027 तक पूर्णतः बाल श्रम मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके तहत बाल श्रमिकों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़कर उनके शारीरिक और मानसिक विकास के लिए विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित किया जाएगा। साथ ही उन्हें स्किल डेवलपमेंट के माध्यम से सक्षम बनाकर उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत किया जाएगा।

स्कन्द कुमार ने आम जनता, व्यापारिक प्रतिष्ठान स्वामियों, दुकानदारों, फैक्ट्री मालिकों, मैरेज हॉल संचालकों, टेंट हाउस, होटल एवं अन्य सेवायोजकों से अपील की है कि 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी प्रकार के कार्य में न लगाया जाए। साथ ही 14 से 18 वर्ष आयु के किशोरों को खतरनाक कार्य या प्रक्रिया में नियोजित करना पूरी तरह प्रतिबंधित है।

उन्होंने चेतावनी दी कि बाल श्रम कराना दण्डनीय अपराध है। बाल श्रम करवाते पाए जाने पर 6 माह से 2 वर्ष तक का कारावास, ₹20,000 से ₹50,000 तक का जुर्माना या दोनों दंडित किया जा सकता है। यदि अपराध दोहराया जाता है तो और भी कठोर कार्रवाई की जाएगी।

सहायक श्रमायुक्त ने आम लोगों से अपील की है कि यदि कहीं भी बाल श्रम देखा जाए तो इसकी सूचना तुरंत श्रम विभाग, विकास भवन देवरिया, जिला टास्क फोर्स या चाइल्डलाइन हेल्पलाइन 1098 पर दें। इससे जनपद देवरिया को बाल श्रम मुक्त बनाने और प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित बचपन और शिक्षा का अधिकार दिलाने में मदद मिलेगी।

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