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बस्तर में अमित शाह का स्पष्ट संदेश: नक्सली हथियार डालें, तभी होगी बातचीत

Published on: October 5, 2025
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार, 4 अक्टूबर 2025 को बस्तर के जगदलपुर में कहा कि नक्सलियों से कोई बातचीत तब तक नहीं होगी जब तक वे हथियार नहीं डालते और सरकार की समर्पण एवं पुनर्वास नीति को स्वीकार नहीं करते

यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में विभिन्न नक्सली गुटों की ओर से कई पत्र जारी किए गए थे, जिनमें हथियार डालने की शर्त पर सरकार के साथ बातचीत को लेकर अलग-अलग विचार व्यक्त किए गए थे।

जगदलपुर के सार्वजनिक मंच पर बोलते हुए अमित शाह ने कहा, “कुछ लोग नक्सलियों के साथ बातचीत की बात कर रहे हैं। मैं फिर स्पष्ट कर दूँ कि केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार दोनों बस्तर और सभी नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं। बातचीत की क्या जरूरत है? इसके लिए लाभकारी समर्पण और पुनर्वास नीति लागू है। आगे आएं और अपने हथियार डालें।”

गृह मंत्री इस अवसर पर बस्तर दशहरा लोकोत्सव और स्वदेशी जागरण मंच द्वारा आयोजित ‘स्वदेशी मेला’ में उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे।

नक्सलवाद समाप्त करने की समय सीमा:
अमित शाह ने मार्च 2026 की समय सीमा दोहराई, जिसे केंद्र सरकार ने देश से नक्सलवाद समाप्त करने के लिए निर्धारित किया है। उन्होंने नक्सलियों को चेतावनी दी, “यदि आप हथियार उठाते हैं और बस्तर की शांति भंग करने की कोशिश करते हैं, तो हमारी सशस्त्र सेनाएं, CRPF और छत्तीसगढ़ पुलिस मुस्तैदी से जवाब देंगी। 31 मार्च 2026 तक इस देश से नक्सलवाद को अलविदा कहा जाएगा।”

‘विकास के लिए संघर्ष’ वाली धारणा पर निशाना:
गृह मंत्री ने उन लोगों पर भी निशाना साधा जिन्होंने नक्सलवाद को ‘विकास के लिए संघर्ष’ बताया। उन्होंने कहा, “दिल्ली में कुछ लोग वर्षों तक गलत सूचना फैलाते रहे कि नक्सलवाद का जन्म विकास के लिए हुआ था। लेकिन मैं अपने आदिवासी भाइयों से कहने आया हूँ कि पूरे बस्तर को विकास से वंचित रखा गया। इसका मुख्य कारण नक्सलवाद ही है।”

अमित शाह ने यह भी कहा कि बुनियादी सुविधाएँ जैसे बिजली, पीने का पानी, सड़कें, हर घर में शौचालय, स्वास्थ्य बीमा 5 लाख रुपये तक, और 5 किलो मुफ्त चावल भारत के हर गाँव में पहुँचे हैं, लेकिन बस्तर में यह नहीं पहुँच सके, जिसके लिए उन्होंने नक्सलवाद को जिम्मेदार ठहराया।

आदिवासियों से अपील:
गृह मंत्री ने क्षेत्र के आदिवासियों से अपील की कि वे अपने गाँव के युवाओं को हथियार डालने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने कहा, “युवाओं को हिंसा से दूर रहना चाहिए, मुख्यधारा में शामिल होना चाहिए और बस्तर के विकास का हिस्सा बनना चाहिए।”


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