जागृत भारत,नई दिल्ली : संसद का मानसून सत्र सोमवार से शुरू होने जा रहा है और इसके हंगामेदार रहने के पूरे आसार हैं। एक ओर केंद्र सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन से पारित कराने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष भी विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है। राजनीतिक दलों के बदलते समीकरण और कई संवेदनशील विषयों के कारण इस बार का सत्र बेहद अहम माना जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, सरकार की प्राथमिकता पिछले सत्र में लंबित रह गए विधेयकों के साथ-साथ नए विधायी प्रस्तावों को आगे बढ़ाने की होगी। हालांकि, परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को अभी तक सरकार के आधिकारिक विधायी एजेंडे में शामिल नहीं किया गया है। इसके बावजूद माना जा रहा है कि सरकार इस विषय पर आगे बढ़ने की रणनीति तैयार कर रही है।
विपक्ष की ओर से इस सत्र में परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक, महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, विदेश नीति, संस्थाओं की स्वायत्तता, राजनीतिक दलों में टूट-फूट और अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाए जाने की संभावना है। कांग्रेस समेत विपक्षी दलों का कहना है कि इन विषयों पर सरकार को जवाब देना होगा।
संसद सत्र के पहले दिन राजधानी में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शनों पर भी राजनीतिक नजर रहेगी। कथित नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। विपक्ष इस मुद्दे को संसद के भीतर भी जोर-शोर से उठाने की तैयारी में है।
परिसीमन और महिला आरक्षण को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस विषय पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। दूसरी ओर, भाजपा के नेतृत्व वाला राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों पर व्यापक राजनीतिक समर्थन जुटाने की कोशिश में लगा हुआ है।
सूत्रों के मुताबिक, विपक्षी गठबंधन के भीतर भी इस मुद्दे पर अलग-अलग राय देखने को मिल रही है। कुछ दलों ने संकेत दिए हैं कि यदि राज्यों के हितों की पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है, तो वे सरकार के प्रस्ताव पर विचार कर सकते हैं। वहीं, कुछ अन्य दल पहले मसौदे का अध्ययन करने के बाद ही अपना अंतिम रुख स्पष्ट करेंगे।
इस बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के समक्ष कुछ दलों के सांसदों के विलय और अलग संसदीय समूह बनाने से जुड़े मामलों पर भी निर्णय लंबित है। इन फैसलों का असर लोकसभा में विभिन्न दलों की संख्या और राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।
सरकार ने मानसून सत्र के लिए जिन प्रमुख विधेयकों को सूचीबद्ध किया है, उनमें एफसीआरए संशोधन विधेयक और विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक भी शामिल हैं। इसके अलावा अन्य महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों पर भी चर्चा और पारित कराने की तैयारी की गई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सरकार जहां विकास और विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने पर जोर देगी, वहीं विपक्ष जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को लगातार घेरने का प्रयास करेगा। ऐसे में आगामी दिनों में संसद के दोनों सदनों में तीखी बहस और कई मुद्दों पर टकराव देखने को मिल सकता है।
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