‘कॉकरोच’ शब्द में खुद को देखा
एहतेशाम हसन ने अपने पत्र में लिखा कि वह लाहौर से अभिजीत दिपके को लिख रहे हैं और लंबे समय बाद भारत से आई किसी खबर में उन्हें अपनी तस्वीर दिखाई दी। उन्होंने कहा कि जब भारत में युवाओं के लिए ‘कॉकरोच’ शब्द का इस्तेमाल किया गया तो पाकिस्तान के युवाओं ने भी उस शब्द को तुरंत पहचान लिया। उनके मुताबिक, बेरोजगार युवा, बिना अवसर के ग्रेजुएट और वे छात्र जिनके सपने परीक्षा पेपर लीक होने से प्रभावित होते हैं, दोनों देशों में समान परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं।
‘आपने पत्थर से घर बना लिया’
पाकिस्तानी युवा ने अभिजीत दिपके के आंदोलन के नाम का जिक्र करते हुए लिखा कि ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम रखकर उन्होंने अपने ऊपर फेंके गए अपमान को ही अपनी ताकत में बदल दिया। उन्होंने कहा कि लाहौर के युवाओं को भी कई बार लगता है कि वे भारत में चल रहे ऐसे ही विरोध-प्रदर्शन के एक शांत रूप के बीच रह रहे हैं।
NEET और पाकिस्तान के परीक्षा घोटालों का जिक्र
एहतेशाम ने भारत के NEET पेपर लीक विवाद और पाकिस्तान में मेडिकल एवं डेंटल कॉलेज प्रवेश परीक्षाओं से जुड़े कथित घोटालों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के परिवार बच्चों की पढ़ाई और कोचिंग के लिए भारी आर्थिक दबाव झेलते हैं। पत्र में बेरोजगारी, गरीबी और युवाओं के लिए सीमित अवसरों को दोनों देशों की साझा समस्याएं बताया गया है।
‘आपका आंदोलन हमारे लिए उम्मीद है’
एहतेशाम हसन ने लिखा कि परीक्षा पेपर लीक केवल एक समस्या है। व्यापक रूप से देखें तो बेरोजगारी, गरीबी और जीवन स्तर से जुड़ी परेशानियां दोनों देशों के युवाओं को प्रभावित करती हैं। उन्होंने कहा कि भारत में युवाओं का आंदोलन पाकिस्तान के लाखों युवाओं के लिए “नई उम्मीद और ताजगी” लेकर आया है।
आजादी के 80 साल बाद सवाल
पत्र में 1947 के विभाजन का जिक्र करते हुए एहतेशाम ने लिखा कि अगस्त का महीना दोनों देशों की सामूहिक आजादी को याद करने का समय है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर आजादी के 80 साल बाद भी लाखों लोगों के पास जीवन की बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं, तो आखिर हासिल क्या हुआ? उन्होंने भारत के युवाओं की डिजिटल पहुंच और आंदोलन की व्यापकता का भी उल्लेख किया और कहा कि पाकिस्तान के युवा भी सोचते हैं कि अगर उन्हें ऐसी डिजिटल जगह और पहुंच मिले तो वे क्या बदलाव ला सकते हैं।
‘आपकी हिम्मत लाहौर के युवाओं को ताकत देती है’
एहतेशाम ने अभिजीत दिपके के आंदोलन को एक साथ चेतावनी और उम्मीद बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि युवाओं की आवाज दबाने, इंटरनेट बंद करने और असहमति को देश-विरोधी बताने जैसी प्रवृत्तियां पूरे क्षेत्र में दिखाई देती हैं। पत्र के अंत में उन्होंने कहा कि अगर दिल्ली में युवा अपनी आवाज बुलंद कर सकते हैं, तो इससे लाहौर और कराची के उन छात्रों को भी हौसला मिलता है जो खुद को घुटन में महसूस करते हैं।