जागृत भारत,गोरखपुर : उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में एक पशु चिकित्सक ने अपार्टमेंट की आठवीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। घटना के बाद पुलिस को उनके पास से एक सुसाइड नोट मिला है, जिसमें उन्होंने अपनी मौत के लिए गरिमा सिंह, उसके पिता और विशाल यादव को जिम्मेदार ठहराया है। नोट में डॉक्टर ने आरोप लगाया कि उन्हें धोखे से लोन दिलाकर करीब 1.40 करोड़ रुपये की रकम हड़प ली गई, जिसके बाद वह भारी बैंक कर्ज और मानसिक तनाव में थे।
घटना गुरुवार सुबह गोरखनाथ थाना क्षेत्र के राजेंद्र नगर स्थित एक अपार्टमेंट में हुई। मृतक की पहचान 45 वर्षीय पशु चिकित्सक परमात्मा सिंह के रूप में हुई है। वह महाराजगंज के पशु चिकित्सालय में तैनात थे और मूल रूप से मऊ जिले के रहने वाले थे।
आठवीं मंजिल से कूदे डॉक्टर
बताया गया कि गुरुवार सुबह परमात्मा सिंह अपार्टमेंट की छत पर टहल रहे थे। इसी दौरान उन्होंने अचानक आठवीं मंजिल से छलांग लगा दी। गिरने की आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। घटना की जानकारी मिलने पर उनकी पत्नी डॉ. सुमित्रा सिंह भी नीचे पहुंचीं।
स्थानीय लोगों की मदद से घायल डॉक्टर को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। घटना की जानकारी मिलने के बाद परिवार में कोहराम मच गया। मृतक की पत्नी भी पशु चिकित्सक हैं। वह गोरखपुर में अपने 12 वर्षीय बेटे और 7 वर्षीय बेटी के साथ रहते थे। मऊ में रह रहे उनके माता-पिता को घटना की जानकारी मिलने के बाद वे भी गोरखपुर के लिए रवाना हो गए।
सुसाइड नोट में लगाया गंभीर आरोप
पुलिस को मिले सुसाइड नोट में परमात्मा सिंह ने गरिमा सिंह, उसके पिता और विशाल यादव को अपनी मौत के लिए जिम्मेदार बताया है। नोट में उन्होंने कथित तौर पर लिखा कि गरिमा सिंह ने उन्हें धोखे से लोन दिलाया और बाद में पूरी रकम अपने पास रख ली। डॉक्टर ने लिखा कि उनके ऊपर बैंक का भारी कर्ज हो गया था और वह मानसिक रूप से प्रताड़ित थे। इसी परेशानी के चलते उन्होंने आत्मघाती कदम उठाया।
छह बैंकों से कराया गया लोन
परिजनों के मुताबिक, परमात्मा सिंह ने पहले होम लोन लिया था, जिसकी नियमित किस्त जमा हो रही थी। इसी दौरान उनके परिचित डॉक्टर दिलीप सिंह ने उन्हें गरिमा सिंह के बारे में बताया। आरोप है कि गरिमा ने दावा किया कि वह लोन की किस्त माफ कराने में मदद कर सकती है।
इसके बाद डॉक्टर की गरिमा सिंह से मुलाकात हुई। आरोप है कि गरिमा ने एक कथित योजना के तहत उन्हें अलग-अलग बैंकों से पर्सनल लोन लेने के लिए कहा। डॉक्टर के दस्तावेज लिए गए और छह बैंकों के आवेदन पर हस्ताक्षर कराए गए। परिवार का आरोप है कि बाद में सभी बैंकों से लोन स्वीकृत हो गए। कुल करीब 1.40 करोड़ रुपये की राशि गरिमा सिंह के खाते में ट्रांसफर की गई। शुरुआत में एक-दो महीने तक लोन की किस्तें जमा की गईं, लेकिन बाद में भुगतान बंद हो गया।
1 लाख की सैलरी, 3 लाख की किस्त का दबाव
परिजनों के अनुसार, किस्त बंद होने के बाद परमात्मा सिंह ने गरिमा सिंह से संपर्क किया। आरोप है कि इस दौरान उन्हें कथित तौर पर धमकियां मिलने लगीं। डॉक्टर परेशान होकर कहते थे कि उनकी करीब एक लाख रुपये की मासिक आय है, जबकि बैंक की किस्त लगभग तीन लाख रुपये हो गई है। ऐसे में वह इतनी बड़ी रकम कैसे चुका पाएंगे। परिजनों का दावा है कि लगातार बढ़ते कर्ज और मानसिक दबाव ने उनकी परेशानी और बढ़ा दी थी।
5 अगस्त को दर्ज कराया था मुकदमा
परमात्मा सिंह ने इस मामले में 5 अगस्त को एम्स थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में गरिमा सिंह, उसके साथी और उसके पिता पर करीब 1.40 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी, धमकी और फर्जी मुकदमे में फंसाने का आरोप लगाया गया था। पुलिस ने मामले की जांच के दौरान गरिमा सिंह और उसके पिता ध्रुव नारायण सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। ध्रुव नारायण सिंह सहजनवा रेलवे स्टेशन पर स्टेशन अधीक्षक के पद पर तैनात बताए गए हैं।
अन्य लोगों से ठगी की भी जांच
पुलिस के मुताबिक, गरिमा सिंह और उसके पिता के खिलाफ अन्य लोगों की ओर से भी शिकायतें और मुकदमे दर्ज हैं। जांच के दौरान पुलिस को गरिमा सिंह की एक डायरी भी मिलने की बात सामने आई है, जिसमें उसके जीवन और संपत्ति से संबंधित कई बातें लिखी होने का दावा किया गया है।
फिलहाल पुलिस डॉक्टर की मौत, सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों और 1.40 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के बीच संबंध की जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस मामले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
इसे भी पढ़ें : गोरखपुर में CM योगी ने निकाली तिरंगा यात्रा, बोले- क्रांतिकारियों का सम्मान करना हर नागरिक का दायित्व
➤ You May Also Like





Discover more from jagrutbharat.com :: जागृत भारत
Subscribe to get the latest posts sent to your email.






























































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































