यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब चीन ने कुछ दिन पहले ही अरुणाचल प्रदेश में स्थानों के नाम बदलने की भारत की कार्रवाई पर आपत्ति जताई थी। सीमा से जुड़े इन घटनाक्रमों ने भारत-चीन संबंधों को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज कर दी है।
BRICS से पहले घटनाक्रम पर नजर
सीमा विवाद को लेकर बयानबाजी की टाइमिंग भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सितंबर में भारत BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने वाला है, जिसमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शामिल होने की संभावना जताई जा रही है। कुछ रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि चीन BRICS सम्मेलन से पहले सीमा से जुड़े मुद्दों को उठाकर भारत पर रणनीतिक और कूटनीतिक दबाव बनाने की कोशिश कर सकता है। हालांकि, यह एक विश्लेषणात्मक आकलन है और इसे चीन की आधिकारिक रणनीति नहीं माना जा सकता।
LAC पर सतर्क रहने की सलाह
रणनीतिक मामलों के जानकार लेफ्टिनेंट नजर एसएल नरसिम्हन (सेवानिवृत्त) ने भारत को पूरी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सतर्क रहने की सलाह दी है। उन्होंने दिसंबर 2022 में तवांग सेक्टर में हुई झड़प का भी उल्लेख किया, जब भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमना-सामना हुआ था। उनके मुताबिक, गलवान की घटना के बाद भारत और चीन ने सीमा क्षेत्रों में बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती की है। ऐसे में किसी भी संभावित गतिविधि पर नजर रखना जरूरी है।
अरुणाचल प्रदेश पर चीन क्यों करता है दावा?
अरुणाचल प्रदेश लंबे समय से भारत और चीन के बीच विवाद का प्रमुख मुद्दा रहा है। चीन अरुणाचल प्रदेश के बड़े हिस्से पर दावा करता है और इसे ‘दक्षिणी तिब्बत’ का हिस्सा बताता है। भारत चीन के इस दावे को पूरी तरह खारिज करता है और अरुणाचल प्रदेश को भारत का अभिन्न हिस्सा बताता है। विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिमी सेक्टर में भारत और चीन के बीच लंबे समय से सैन्य तैनाती और निगरानी व्यवस्था मजबूत है। ऐसे में अरुणाचल प्रदेश चीन के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र बना हुआ है।
जगहों के नाम बदलने पर चीन की आपत्ति
हाल में चीन ने अरुणाचल प्रदेश में कुछ स्थानों के नाम बदले जाने को लेकर भारत की आलोचना की थी। भारत पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और वहां के स्थानों के नाम बदलने का चीन को कोई अधिकार नहीं है।
सीमा विवाद से जुड़े इन घटनाक्रमों के बीच भारत के लिए चुनौती यह है कि एक ओर LAC पर शांति और स्थिरता बनाए रखी जाए, वहीं दूसरी ओर सितंबर में होने वाले BRICS सम्मेलन जैसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक आयोजन के दौरान द्विपक्षीय संबंधों को संभाला जाए। फिलहाल भारत ने सुबनसिरी से जुड़े कथित पेट्रोलिंग विवाद को खारिज कर दिया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि LAC पर किसी भी नए घटनाक्रम को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।