रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यदि शराब की बिक्री नियंत्रित तरीके से दोबारा शुरू की जाती है तो बिहार के अपने राजस्व में करीब 14 से 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके साथ ही रिपोर्ट में शराबबंदी के बाद अवैध शराब की तस्करी, दूसरे नशीले पदार्थों के इस्तेमाल और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन में आने वाली चुनौतियों का भी जिक्र किया गया है।
क्या शराबबंदी खत्म करेगी सम्राट चौधरी सरकार?
NCAER की रिपोर्ट सामने आने के बाद सवाल उठने लगा है कि क्या भाजपा के नेतृत्व वाली बिहार सरकार शराबबंदी को खत्म करने पर विचार करेगी? हालांकि, सत्तारूढ़ गठबंधन में फिलहाल इस मुद्दे पर स्पष्ट सहमति नजर नहीं आ रही है। जदयू ने शराबबंदी की समीक्षा या इसे समाप्त करने की संभावना को खारिज किया है। शराबबंदी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत और सामाजिक सुधार के प्रमुख एजेंडे का हिस्सा रही है। अप्रैल 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिलाओं की मांग और सामाजिक सुधार को आधार बनाकर बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू की थी।
जदयू का रुख साफ, नहीं होगी शराबबंदी की समीक्षा
शराबबंदी लागू होने के बाद से ही बिहार में अवैध शराब की तस्करी और कानून के क्रियान्वयन को लेकर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि, जदयू का कहना है कि फिलहाल इस कानून को खत्म करने या इसकी समीक्षा करने का कोई सवाल नहीं है। वहीं, हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी लंबे समय से शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन पर सवाल उठाते रहे हैं। NCAER की रिपोर्ट के बाद उन्होंने गुजरात मॉडल की तर्ज पर बिहार में शराबबंदी कानून लागू करने की बात कही है।
राजद विधायक ने भी सरकार पर साधा निशाना
राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने शराबबंदी को लेकर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि “बिहार में शराबबंदी बिना किसी सर्वे के लागू की गई थी और मैं खुद इसका गवाह हूं।” उन्होंने नेपाल, झारखंड और छत्तीसगढ़ की सीमाओं से होने वाली शराब की तस्करी रोकने के लिए सरकार से गंभीर कदम उठाने की मांग की। साथ ही उन्होंने अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाया और आरोप लगाया कि शराब की बड़ी खेप के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर कुछ ही ट्रकों को पकड़कर उपलब्धि दिखाई जाती है।
BJP ने कहा- फैसला कैबिनेट का होगा
भाजपा प्रवक्ता कुंतल कृष्ण ने कहा कि अलग-अलग शोध संस्थानों की रिपोर्ट समय-समय पर सामने आती रहती हैं और सरकार सभी पहलुओं पर विचार करती है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी का फैसला सामूहिक निर्णय था और वर्ष 2016 में लगभग सभी राजनीतिक दलों ने इसका समर्थन किया था।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शराबबंदी की समय-समय पर समीक्षा होती रही है और नई रिपोर्ट के निष्कर्षों पर भी विचार किया जा सकता है। हालांकि, आगे क्या फैसला लिया जाएगा, यह कैबिनेट का सामूहिक निर्णय होगा।
दो चुनावों में जनता ने किया समर्थन: BJP
भाजपा ने यह भी दावा किया कि बिहार की जनता ने दो आम चुनावों में पूर्ण शराबबंदी के मुद्दे पर अपना समर्थन दिया है। पार्टी के मुताबिक, फिलहाल राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू है और सरकार की नीति में तत्काल कोई बदलाव नहीं हुआ है। NCAER की रिपोर्ट ने हालांकि शराबबंदी के राजस्व, सामाजिक प्रभाव, अवैध तस्करी और कानून-व्यवस्था से जुड़े पहलुओं पर एक नई बहस जरूर शुरू कर दी है। अब देखना होगा कि बिहार सरकार इस रिपोर्ट के निष्कर्षों को किस नजरिए से देखती है और आने वाले समय में शराबबंदी की नीति में कोई बदलाव होता है या नहीं।