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ईरान में बड़ा सत्ता बदलाव, पूर्व IRGC चीफ मोहसिन रेजाई बने नए सिक्योरिटी चीफ; होर्मुज पर बढ़ सकता है तनाव

Published on: August 12, 2026
Major power shift in Iran

जागृत भारत,तेहरान : अमेरिका के साथ बढ़ते टकराव और खाड़ी क्षेत्र में जारी तनाव के बीच ईरान ने अपनी शीर्ष सुरक्षा संस्था सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (SNSC) में बड़ा बदलाव किया है। ईरान ने इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पूर्व कमांडर-इन-चीफ मोहसिन रेजाई को SNSC का नया सचिव नियुक्त किया है। वह बाकर जोरगाद्र की जगह लेंगे।

रेजाई को ईरान के कट्टरपंथी नेताओं में गिना जाता है और वह अमेरिका तथा इजरायल के खिलाफ कड़ा रुख रखने के लिए जाने जाते हैं। उनकी नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान और पश्चिमी देशों के बीच तनाव बना हुआ है।

रेजाई को मिली दोहरी जिम्मेदारी

मोहसिन रेजाई की नियुक्ति को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि उन्हें SNSC के सचिव के साथ-साथ सुप्रीम लीडर के प्रतिनिधि की जिम्मेदारी भी दी गई है। इससे उन्हें काउंसिल में औपचारिक सीट और वोट का अधिकार मिलेगा। यह दोहरी भूमिका उनके पूर्ववर्ती के मुकाबले उन्हें अधिक प्रभावशाली स्थिति में रखती है। SNSC ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों में प्रमुख भूमिका निभाती है। ऐसे में रेजाई की नियुक्ति से देश की सुरक्षा नीति पर उनका प्रभाव बढ़ने की संभावना है।

सत्ता के समीकरण में बदलाव के संकेत

ईरान में इस नियुक्ति को सत्ता के भीतर अलग-अलग धड़ों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान शुरुआत में इस बदलाव को लेकर पूरी तरह तैयार नहीं थे। बताया जाता है कि मोजतबा खामेनेई और पेजेश्कियान के बीच बैठक के बाद इस मुद्दे पर सहमति बनी। इसके बाद मोजतबा ने रेजाई को अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया, जबकि जोरगाद्र को सुप्रीम लीडर का राजनीतिक सलाहकार बनाया गया और पेजेश्कियान ने रेजाई को SNSC सचिव नियुक्त किया।

कट्टरपंथी धड़े को मजबूती?

रेजाई की नियुक्ति को तेहरान की सत्ता व्यवस्था में कट्टरपंथी धड़े के प्रभाव बढ़ने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, उनके पूर्ववर्ती भी IRGC से जुड़े रहे हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर उनका रुख भी सख्त रहा है। रेजाई का अंतर सिर्फ उनके पद में नहीं, बल्कि उनके लंबे सैन्य और राजनीतिक अनुभव में भी है। वह ईरान के सुरक्षा तंत्र में दशकों से प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे हैं।

कौन हैं मोहसिन रेजाई?

71 वर्षीय मोहसिन रेजाई ने 1981 से 1997 तक IRGC की कमान संभाली थी। उनके नेतृत्व के दौरान ईरान-इराक युद्ध हुआ। इसके बाद वह ईरान की एक्सपीडिएंसी डिसर्नमेंट काउंसिल से जुड़े, जो संसद और गार्जियन काउंसिल के बीच कानूनों को लेकर होने वाले मतभेदों को सुलझाने में भूमिका निभाती है। इस लंबे अनुभव के कारण रेजाई को ईरान के सुरक्षा और राजनीतिक तंत्र की गहरी समझ रखने वाला नेता माना जाता है।

होर्मुज पर रेजाई का सख्त रुख

रेजाई की नियुक्ति का असर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान की रणनीति पर भी पड़ सकता है। वह पहले ही इस रणनीतिक जलमार्ग पर ईरान के नियंत्रण को बेहद महत्वपूर्ण बता चुके हैं। जुलाई में रेजाई ने कहा था कि होर्मुज पर नियंत्रण परमाणु बम से भी ज्यादा मूल्यवान है। हाल ही में उन्होंने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रही तो अमेरिका को गंभीर जोखिम और जान-माल के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

ऐसे में SNSC की कमान रेजाई के हाथों में आने से ईरान की सुरक्षा नीति और खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर उसका रुख आने वाले समय में और आक्रामक होने की आशंका जताई जा रही है।


इसे भी पढ़ें : दक्षिण चीन सागर संघर्ष में चीन ने एक साल बाद मानी 2 सैनिकों की मौत, फिलीपींस से टकराव में गई थी जान


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