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‘इस्लामिक NATO’ बनाने की ख्वाजा आसिफ की अपील, भारत-इजरायल से चुनौती का किया जिक्र

Published on: August 9, 2026
of creating an 'Islamic NATO'

जागृत भारत,इस्लामाबाद : सऊदी अरब और तुर्किए के साथ ‘मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट’ पर हस्ताक्षर के एक दिन बाद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने मुस्लिम देशों के बीच एक बड़े रक्षा गठबंधन की वकालत की है। उन्होंने भारत और इजरायल से कथित चुनौतियों का सामना करने के लिए NATO की तर्ज पर एक मजबूत इस्लामिक रक्षा गठबंधन बनाने की अपील की।

सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किए के बीच हुए समझौते के तहत तीनों देशों ने सहमति जताई है कि किसी एक सदस्य देश पर होने वाला सशस्त्र हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इस प्रावधान की तुलना NATO के आर्टिकल 5 से की जा रही है, जिसमें किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति में उसे पूरे गठबंधन पर हमला माना जाता है।

आतंकवाद को बताया ‘साझा खतरा’

एक पाकिस्तानी न्यूज चैनल से बातचीत में ख्वाजा आसिफ ने आतंकवाद को पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए के लिए साझा खतरा बताया। उन्होंने दावा किया कि अफगानिस्तान से सक्रिय भारत समर्थित तत्व पाकिस्तान के खिलाफ आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं।

हालांकि, भारत की ओर से ऐसे आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ख्वाजा आसिफ ने क्षेत्रीय विवादों, जिसमें भारत के साथ हालिया सैन्य टकराव भी शामिल है, को मीडिया बहस के बजाय आधिकारिक माध्यमों से हल करने की जरूरत बताई।

‘मुस्लिम देशों को NATO जैसा गठबंधन बनाना चाहिए’

पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने कहा कि मुस्लिम देशों को अपने आपसी मतभेदों को पीछे छोड़कर NATO की तर्ज पर एक व्यापक रक्षा गठबंधन तैयार करना चाहिए। उनके मुताबिक, ऐसे गठबंधन का उद्देश्य सदस्य देशों की सामूहिक सुरक्षा सुनिश्चित करना और बाहरी खतरों से मिलकर निपटना होना चाहिए।

ख्वाजा आसिफ ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का भी जिक्र किया। उन्होंने अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी तनाव को मुस्लिम देशों के लिए सामूहिक कूटनीतिक प्रयासों की जरूरत का संकेत बताया।

इजरायल को लेकर भी दिया बयान

ख्वाजा आसिफ ने इजरायल की स्थापना और उसकी मौजूदा नीतियों के खिलाफ मुस्लिम देशों को एकजुट होने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि इजरायल के साथ संबंध सामान्य करने से मुस्लिम देशों को कोई फायदा नहीं होगा।

उनका यह बयान पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए के बीच नए रक्षा समझौते के तुरंत बाद आया है। इस समझौते को क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, ‘इस्लामिक NATO’ जैसे व्यापक गठबंधन की व्यवहारिकता और संभावित सदस्य देशों को लेकर अभी कोई औपचारिक पहल सामने नहीं आई है।


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