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भीषण गर्मी की मार: अफ्रीका से राजस्थान तक ऊंटों पर मंडराया संकट, तेजी से घट रही संख्या

Published on: August 4, 2026
The brunt of the scorching heat

जागृत भारत,अदीस अबाबा/जयपुर : जलवायु परिवर्तन का असर अब केवल इंसानों और पर्यावरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि रेगिस्तान का सबसे मजबूत जीव माने जाने वाले ऊंट भी इसकी चपेट में आ गए हैं। अफ्रीका के सहारा और हॉर्न ऑफ अफ्रीका से लेकर भारत के राजस्थान तक बढ़ते तापमान, सूखा और बदलते मौसम के कारण ऊंटों की मौत और उनकी घटती संख्या चिंता का विषय बन गई है।

अफ्रीका में गर्मी से ऊंटों की मौत

साल 2025 में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, अत्यधिक गर्मी और जलवायु परिवर्तन का ऊंटों के स्वास्थ्य, प्रजनन क्षमता और उत्पादकता पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। उत्तरी अफ्रीका और हॉर्न ऑफ अफ्रीका में बड़ी संख्या में पाए जाने वाले एक कूबड़ वाले ऊंटों पर इसका सबसे ज्यादा असर देखा जा रहा है।

इथियोपिया के अफार क्षेत्र के सोमेरा गांव में करीब 500 ऊंटों के मालिक अली उमर ने बताया कि भीषण गर्मी के कारण उन्होंने केवल एक महीने में कई ऊंटों के बच्चों को खो दिया। उनके मुताबिक, तापमान अब पहले की तुलना में कहीं अधिक खतरनाक हो चुका है।

सोमालिया में सूखे ने बढ़ाई परेशानी

जून 2025 में प्रकाशित एक अन्य शोध के अनुसार, पड़ोसी देश सोमालिया में लंबे समय से पड़ रहे सूखे ने ऊंटों के अस्तित्व पर गंभीर संकट पैदा कर दिया है। पानी और चारे की कमी के चलते बड़ी संख्या में ऊंटों की मौत दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बदलते मौसम और बढ़ती गर्मी भविष्य में इस समस्या को और गंभीर बना सकते हैं।

राजस्थान में तेजी से घट रही ऊंटों की आबादी

ऊंटों का संकट केवल अफ्रीका तक सीमित नहीं है। भारत के थार रेगिस्तान में भी ऊंटों की संख्या लगातार घट रही है। हालांकि, यहां इसकी प्रमुख वजह जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक बदलाव भी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, नई पीढ़ी ऊंट पालन में पहले जैसी रुचि नहीं दिखा रही है, जिससे पारंपरिक पशुपालन तेजी से कम हो रहा है।

राजस्थान पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2012 में राज्य में लगभग 7.46 लाख ऊंट थे, जबकि वर्ष 2025 तक यह संख्या घटकर करीब 2.13 लाख रह गई। यानी पिछले एक दशक में ऊंटों की आबादी में लगभग 70 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

विशेषज्ञों की चेतावनी

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जलवायु परिवर्तन की रफ्तार और पारंपरिक पशुपालन में गिरावट इसी तरह जारी रही, तो आने वाले वर्षों में ऊंटों का अस्तित्व और अधिक खतरे में पड़ सकता है। उनका कहना है कि इस अनोखे रेगिस्तानी जीव के संरक्षण के लिए जलवायु अनुकूल नीतियों, बेहतर पशु स्वास्थ्य सुविधाओं और ऊंट पालन को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रमों की आवश्यकता है।



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