जागृत भारत,तेल अवीव : भारत और इजरायल के बीच रक्षा सहयोग लगातार मजबूत हुआ है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अब दोनों देशों को अपनी रणनीतिक साझेदारी का दायरा रक्षा क्षेत्र से आगे बढ़ाकर उन्नत विनिर्माण (Advanced Manufacturing), इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और भारी इलेक्ट्रिकल उपकरणों जैसे भविष्य के उद्योगों तक ले जाना चाहिए। उनका मानना है कि यही सहयोग दोनों देशों को वैश्विक सप्लाई चेन में अधिक मजबूत और प्रभावशाली बना सकता है।
इजरायली समाचार पत्र Ynet News में प्रकाशित एक लेख में भू-राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ डॉ. यशवर्धन सिंह ने कहा कि रक्षा सौदे आमतौर पर खरीद-बिक्री तक सीमित होते हैं, जबकि औद्योगिक साझेदारी दोनों देशों की सप्लाई चेन, निवेश, तकनीक और मानव संसाधन को स्थायी रूप से जोड़ सकती है। उनका कहना है कि ऐसी साझेदारी को तोड़ना आसान नहीं होगा और यही इसकी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत होगी।
सप्लाई चेन में भरोसेमंद साझेदारी की जरूरत
डॉ. सिंह के अनुसार, कोविड-19 महामारी के बाद दुनिया की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। अब देश केवल कम लागत वाली सप्लाई चेन पर निर्भर नहीं रहना चाहते, बल्कि भरोसेमंद और स्थायी साझेदारों के साथ उत्पादन नेटवर्क विकसित करने पर जोर दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भारत भी इलेक्ट्रॉनिक्स, टेलीकॉम उपकरण और एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में अपनी प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के जरिए विश्वसनीय देशों के साथ औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा दे रहा है। उनका मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन के बढ़ते जोखिमों को देखते हुए यह रणनीति भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
भारत-इजरायल आर्थिक रिश्ते हो रहे मजबूत
विशेषज्ञ के अनुसार, क्षेत्रीय चुनौतियों के बावजूद भारत और इजरायल आर्थिक सहयोग को संस्थागत रूप देने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहे हैं। दोनों देशों ने सितंबर 2025 में द्विपक्षीय निवेश समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद नवंबर 2025 में व्यापक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत शुरू करने के लिए ‘टर्म्स ऑफ रेफरेंस’ पर सहमति बनी। इस समझौते पर वार्ता 2026 में भी जारी रही और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल की संसद (नेसेट) में अपने संबोधन के दौरान इसे जल्द अंतिम रूप देने की अपील की थी।
भारत की उत्पादन क्षमता, इजरायल की तकनीकी ताकत
लेख में कहा गया है कि भारी इलेक्ट्रिकल उपकरणों के निर्माण में भारत पहले से ही मजबूत औद्योगिक आधार रखता है। भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL), सीमेंस इंडिया, एबीबी इंडिया, सीजी पावर, हिताची एनर्जी इंडिया, श्नाइडर इलेक्ट्रिक इंडिया, लार्सन एंड टुब्रो, हैवेल्स और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड जैसी कंपनियां भारत को दुनिया के प्रमुख इलेक्ट्रिकल मैन्युफैक्चरिंग केंद्रों में शामिल करती हैं।
दूसरी ओर, इजरायल मशीन विजन, रोबोटिक्स, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन, प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस और औद्योगिक साइबर सुरक्षा जैसी अत्याधुनिक तकनीकों में अग्रणी माना जाता है। यहां 200 से अधिक कंपनियां इन क्षेत्रों में काम कर रही हैं।
दोनों देशों को मिल सकता है बड़ा रणनीतिक लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत की विशाल विनिर्माण क्षमता और इजरायल की नवाचार एवं तकनीकी विशेषज्ञता को एक साथ जोड़ा जाए, तो दोनों देश न केवल वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक मजबूत बना सकते हैं, बल्कि भविष्य की हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इससे दोनों देशों की आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी रक्षा क्षेत्र से आगे बढ़कर दीर्घकालिक और अधिक मजबूत स्वरूप ले सकती है।
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