जागृत भारत,मास्को : यूक्रेन युद्ध के बीच रूस अपनी नौसैनिक ताकत को और मजबूत करने की तैयारी में है। रूसी नौसेना ने पुष्टि की है कि परमाणु ऊर्जा से संचालित दुनिया के सबसे शक्तिशाली युद्धपोतों में शामिल Admiral Nakhimov को वर्ष 2026 में व्यापक आधुनिकीकरण (Modernization) के बाद दोबारा सेवा में शामिल किया जाएगा। रिपोर्टों के अनुसार, इस युद्धपोत पर तीन Ka-31 Airborne Early Warning and Control (AEW&C) हेलिकॉप्टर तैनात किए जा सकते हैं, जिससे इसकी निगरानी और वायु रक्षा क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।
दुनिया के सबसे हथियारबंद युद्धपोतों में शामिल
Admiral Nakhimov को दुनिया के सबसे अधिक हथियारों से लैस युद्धपोतों में गिना जाता है। आधुनिकीकृत संस्करण में इस पर 96 वर्टिकल लॉन्च सेल तैनात किए गए हैं, जिनसे लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें दागी जा सकती हैं। इसके अलावा जहाज पर 80 से अधिक क्रूज मिसाइलें तैनात होंगी, जिनमें रूस की अत्याधुनिक Zircon हाइपरसोनिक मिसाइलें भी शामिल हैं।
परमाणु ऊर्जा से संचालित होने के कारण यह युद्धपोत लंबे समय तक बिना ईंधन भरे समुद्र में अभियान चला सकता है और दुनिया के सबसे तेज तथा लंबी दूरी तक संचालन करने वाले युद्धपोतों में माना जाता है।
Ka-31 हेलिकॉप्टर बढ़ाएंगे निगरानी क्षमता
Military Watch Magazine की रिपोर्ट के मुताबिक, Admiral Nakhimov पर तीन Ka-31 AEW&C हेलिकॉप्टर तैनात किए जाने की योजना है। इन्हें नौसेना के लिए विशेष रूप से विकसित किया गया है और इन्हें उड़ता हुआ रडार (Flying Radar) भी कहा जाता है।
इन हेलिकॉप्टरों में लगा शक्तिशाली रडार लगभग 150 किलोमीटर की दूरी से लड़ाकू विमानों और क्रूज मिसाइलों का पता लगाने में सक्षम है, जबकि बड़े हवाई लक्ष्यों को इससे भी अधिक दूरी से ट्रैक किया जा सकता है। इनसे प्राप्त जानकारी सीधे युद्धपोत के कमांड सेंटर या अन्य रूसी लड़ाकू विमानों तक भेजी जा सकती है।
S-400 और Zircon मिसाइलों को मिलेगा बड़ा फायदा
Ka-31 हेलिकॉप्टरों से मिलने वाली रीयल-टाइम जानकारी के जरिए युद्धपोत पर तैनात S-400 एयर डिफेंस सिस्टम और Zircon हाइपरसोनिक मिसाइलों को लक्ष्य की पहले से पहचान मिल सकेगी। इससे संभावित हवाई खतरों का तेजी से पता लगाकर उन पर अधिक प्रभावी कार्रवाई की जा सकेगी।
रूसी नौसेना की क्षमता होगी मजबूत
रूसी नौसेना का कहना है कि आधुनिकीकरण के बाद Admiral Nakhimov केवल अधिक मारक क्षमता के साथ ही नहीं लौटेगा, बल्कि उसकी हवाई निगरानी, लक्ष्य पहचान और बहुस्तरीय वायु रक्षा क्षमता भी पहले की तुलना में काफी बेहतर होगी। इससे यह युद्धपोत भविष्य के समुद्री अभियानों में रूस की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्तियों में शामिल हो जाएगा।
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