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लोकसभा में एंटी-पेपर लीक कानून में संशोधन विधेयक पेश, डॉ. जितेंद्र सिंह ने रखा प्रस्ताव

Published on: July 28, 2026
Anti-paper leak in Lok Sabha

जागृत भारत,नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने सोमवार को लोकसभा में ‘Public Examinations (Prevention of Unfair Means) (Amendment) Bill, 2026’ पेश किया। इस संशोधन विधेयक का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं पर अधिक सख्ती करना, जांच और अभियोजन की प्रक्रिया को तेज करना तथा दोषियों के लिए कड़े दंड का प्रावधान करना है।

यह विधेयक केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन में प्रस्तुत किया।

कौन हैं डॉ. जितेंद्र सिंह?

डॉ. जितेंद्र सिंह:

  • जम्मू-कश्मीर के उधमपुर लोकसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसद हैं।
  • उनका जन्म 6 नवंबर 1956 को हुआ।
  • राजनीति में आने से पहले वे डायबिटीज विशेषज्ञ (फिजिशियन) के रूप में कार्य कर चुके हैं।
  • उन्होंने सरकारी मेडिकल कॉलेज, जम्मू से MBBS और मेडिसिन में MD की शिक्षा प्राप्त की।
  • वर्ष 2014 में पहली बार लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए और उसके बाद लगातार सांसद चुने गए।

केंद्र सरकार में जिम्मेदारियां

डॉ. जितेंद्र सिंह वर्तमान में:

  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री (स्वतंत्र प्रभार),
  • पृथ्वी विज्ञान मंत्री (स्वतंत्र प्रभार),
  • तथा प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष विभाग में राज्य मंत्री के रूप में कार्यरत हैं।

चूंकि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) सार्वजनिक परीक्षाओं से जुड़े कानूनों का नोडल विभाग है, इसलिए इसी मंत्रालय ने यह संशोधन विधेयक संसद में पेश किया है।

एंटी-पेपर लीक कानून से संबंध

डॉ. जितेंद्र सिंह ने वर्ष 2024 में भी Public Examinations (Prevention of Unfair Means) Bill संसद में प्रस्तुत किया था। अब उसी कानून को और प्रभावी बनाने के लिए संशोधन प्रस्तावित किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, संशोधन में निम्नलिखित प्रावधानों का प्रस्ताव है:

  • संगठित पेपर लीक गिरोहों के खिलाफ अधिक कठोर दंड।
  • अधिक जुर्माना और लंबी अवधि के कारावास का प्रावधान।
  • मामलों की समयबद्ध जांच।
  • त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों की व्यवस्था।

आगे क्या होगा?

विधेयक पेश होने के बाद उस पर संसद में चर्चा होगी। यदि इसे लोकसभा और राज्यसभा दोनों से पारित कर दिया जाता है तथा राष्ट्रपति की मंजूरी मिल जाती है, तो संशोधित कानून लागू हो जाएगा। तब तक यह प्रस्तावित विधेयक है और इसकी अंतिम रूपरेखा संसदीय प्रक्रिया के दौरान बदल भी सकती है।



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