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अगले महीनों में प्रधानमंत्री मोदी का व्यस्त कूटनीतिक कार्यक्रम, SCO, BRICS और UNGA पर रहेंगी नजरें

Published on: July 28, 2026
Prime Minister Modi in the coming months

जागृत भारत,नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आने वाले महीनों में कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय बैठकों और कार्यक्रमों में भाग लेने वाले हैं। इनमें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन, भारत की मेजबानी में होने वाला BRICS शिखर सम्मेलन और संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) का उच्च-स्तरीय सत्र प्रमुख हैं।

प्रस्तावित कार्यक्रम

  • SCO शिखर सम्मेलन: वर्ष 2026 का शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन 31 अगस्त–1 सितंबर 2026 को किर्गिस्तान में आयोजित होने वाला है, जिसमें प्रधानमंत्री मोदी के शामिल होने की उम्मीद है।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA): संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) का 81वां सत्र 8 सितंबर 2026 से न्यूयॉर्क में शुरू होगा। उच्च-स्तरीय आम बहस 22 सितंबर से आरंभ होगी। प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन की सटीक तिथि अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं की गई है।
  • BRICS शिखर सम्मेलन: भारत 12–13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। सम्मेलन का आयोजन भारत मंडपम में प्रस्तावित है और इसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री मोदी करेंगे।

BRICS सम्मेलन का फोकस

भारत ने अपनी अध्यक्षता के लिए “Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” (लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता) को थीम बनाया है। सम्मेलन में संभावित रूप से इन विषयों पर चर्चा होगी:

  • ग्लोबल साउथ की आवाज़ को मजबूत करना।
  • डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (Digital Public Infrastructure) को बढ़ावा देना।
  • सतत विकास और आर्थिक सहयोग।

BRICS के सदस्य

रिपोर्ट के अनुसार, BRICS में अब 11 सदस्य देश शामिल हैं:

  • ब्राज़ील
  • रूस
  • भारत
  • चीन
  • दक्षिण अफ्रीका
  • मिस्र
  • इथियोपिया
  • ईरान
  • सऊदी अरब
  • संयुक्त अरब अमीरात
  • इंडोनेशिया

UNGA में भारत का रुख

संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन को भारत की विदेश नीति के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जाता है। पिछले वर्षों में उन्होंने वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ सहयोग, वैश्विक संस्थाओं में सुधार, विकासशील देशों की चिंताओं और बहुपक्षीय सहयोग जैसे विषयों पर भारत का पक्ष प्रमुखता से रखा है।

इन तीनों अंतरराष्ट्रीय आयोजनों पर दुनिया की नजर रहेगी, क्योंकि इनमें क्षेत्रीय सुरक्षा, वैश्विक आर्थिक सहयोग, व्यापार, विकास और बहुपक्षीय कूटनीति से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।



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