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मालदीव ने SAARC को फिर सक्रिय करने की पैरवी की, भारत अब भी सतर्क रुख पर कायम

Published on: July 28, 2026
Maldives rejoins SAARC

जागृत भारत,माले/नई दिल्ली : मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने कहा है कि उनका देश दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ (SAARC) की गतिविधियों को पुनर्जीवित करने और सदस्य देशों के बीच संवाद बहाल कराने में रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि SAARC की स्थापना में मालदीव संस्थापक सदस्यों में शामिल था और इस संगठन ने दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

मुइज्जू ने यह भी कहा कि पिछले लगभग नौ वर्षों से SAARC की गतिविधियां प्रभावी रूप से ठप हैं और क्षेत्रीय सहयोग को फिर से गति देने की आवश्यकता है।

कई पड़ोसी देश भी कर रहे हैं पुनर्जीवन की मांग

रिपोर्ट के अनुसार, बांग्लादेश और नेपाल सहित कुछ अन्य दक्षिण एशियाई देशों ने भी हाल के समय में SAARC को फिर से सक्रिय करने की वकालत की है। हालांकि, भारत ने अभी तक इस दिशा में कोई संकेत नहीं दिया है कि वह संगठन की पूर्ण बहाली के लिए पहल करेगा।

भारत का रुख

भारत का आधिकारिक रुख लंबे समय से यह रहा है कि सीमा-पार आतंकवाद और सामान्य संवाद साथ-साथ नहीं चल सकते। वर्ष 2016 के बाद से SAARC शिखर सम्मेलन आयोजित नहीं हो सका है। भारत ने पाकिस्तान से जुड़े सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दों को प्रमुख कारणों में बताया है।

इसी दौरान भारत ने क्षेत्रीय सहयोग के लिए अन्य मंचों पर अधिक ध्यान दिया है, जिनमें प्रमुख हैं:

  • BIMSTEC
  • BBIN
  • Quad
  • BRICS
  • I2U2
  • India-Middle East-Europe Economic Corridor (IMEC)

पाकिस्तान की रुचि

विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान SAARC को फिर से सक्रिय देखना चाहता है क्योंकि यह दक्षिण एशिया का प्रमुख क्षेत्रीय मंच है, जहां वह भारत सहित अन्य पड़ोसी देशों के साथ बहुपक्षीय स्तर पर जुड़ सकता है। दूसरी ओर, आलोचकों का तर्क है कि SAARC में सर्वसम्मति (Consensus) के सिद्धांत के कारण अतीत में कुछ क्षेत्रीय परियोजनाएं आगे नहीं बढ़ सकीं।

संतुलित परिप्रेक्ष्य

  • तथ्य: मालदीव के राष्ट्रपति द्वारा SAARC को पुनर्जीवित करने की अपील और भारत द्वारा हाल के वर्षों में BIMSTEC जैसे वैकल्पिक मंचों पर अधिक जोर देना स्थापित तथ्य हैं।
  • विश्लेषण: यह कहना कि SAARC का पुनर्जीवन मुख्यतः किसी एक देश को “मजबूत” या “कमज़ोर” करेगा, या किसी नेता की विचारधारा किसी अन्य देश से मेल खाती है, विश्लेषणात्मक या राजनीतिक राय है, न कि स्थापित तथ्य।
  • SAARC के भविष्य को लेकर सदस्य देशों के बीच अलग-अलग दृष्टिकोण हैं और इसकी पुनर्बहाली सभी सदस्य देशों की सहमति पर निर्भर करेगी।


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