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अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पाकिस्तान सक्रिय, विदेश मंत्रियों की बातचीत में शांति और स्थिरता पर जोर

Published on: June 28, 2026
Amidst US-Iran tensions
जागृत भारत,इस्लामाबाद : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान ने कूटनीतिक स्तर पर सक्रियता बढ़ा दी है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत कर क्षेत्रीय हालात और शांति प्रक्रिया पर चर्चा की। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस बातचीत की पुष्टि की है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इशाक डार ने दोहराया कि पाकिस्तान क्षेत्र और उससे बाहर स्थायी शांति एवं स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने मौजूदा हालात में संवाद और कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
बयान के मुताबिक, ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शांति प्रक्रिया में पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की। साथ ही उन्होंने ईरानी मछुआरों की सुरक्षित और सुचारू वापसी में सहयोग के लिए पाकिस्तान सरकार का आभार व्यक्त किया। दोनों नेताओं ने भविष्य में भी लगातार संपर्क बनाए रखने पर सहमति जताई।
यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सैन्य तनाव बढ़ गया है। दोनों देश हाल ही में हुए अंतरिम समझौते के तहत स्थायी युद्धविराम और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर बातचीत कर रहे थे, लेकिन ताजा घटनाक्रम ने इस प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तनाव की शुरुआत गुरुवार को सिंगापुर के झंडे वाले तेल टैंकर एयर लवली पर हुए हमले से हुई। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों को निकालने का अपना अभियान अस्थायी रूप से रोक दिया। एजेंसी का कहना है कि जब तक समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक अभियान दोबारा शुरू नहीं किया जाएगा।
इसके जवाब में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले किए। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई कमर्शियल जहाज पर हुए ड्रोन हमले के जवाब में की गई। वहीं, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया कि उसने क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है।
लगातार हो रहे इन हमलों ने दोनों देशों के बीच लागू युद्धविराम की स्थिति को फिर से अनिश्चित बना दिया है। साथ ही, इससे क्षेत्रीय सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और शांति वार्ता के भविष्य को लेकर नई चिंताएं भी पैदा हो गई हैं।

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