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निष्पक्षता और सत्य के साथ देश-निर्माण में भागीदार बने मीडिया” — उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन

Published on: November 17, 2025
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जागृत भारत | हैदराबाद(Hydrabad) : तेलंगाना में आयोजित रमो़जी एक्सीलेंस अवार्ड्स 2025 समारोह के दौरान भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने मीडिया को लोकतंत्र की सुदृढ़ता और देश के विकास का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए कहा कि मीडिया को वस्तुनिष्ठता (Objectivity) और निष्पक्षता (Fairness) के साथ राष्ट्र-निर्माण की प्रक्रिया में सहभागी बनना चाहिए।

उन्होंने कहा कि आज के समय में सूचना का प्रवाह तेज हो गया है और ऐसे माहौल में जिम्मेदार पत्रकारिता पहले से अधिक जरूरी हो गई है। उपराष्ट्रपति ने कहा कि मीडिया का कर्तव्य केवल खबरें दिखाना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक विमर्श, पारदर्शिता और जनता के हित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से सामने लाना भी है।

“मीडिया का दायित्व आलोचना से आगे बढ़कर समाधान और प्रेरणा दिखाना भी है” — उपराष्ट्रपति

राधाकृष्णन ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मीडिया चौथे स्तंभ के रूप में जनता और शासन के बीच पुल का काम करता है। इसलिए मीडिया को चाहिए कि वह तथ्यों की पुष्टि कर जिम्मेदारी से रिपोर्टिंग करे, ताकि समाज में सही संदेश पहुंचे और गलत सूचनाओं का प्रसार न हो।

उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि डिजिटल युग में फर्जी खबरें और भ्रामक सूचनाएँ तेजी से फैलती हैं। ऐसे समय में मीडिया को अपनी विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सत्यता, संतुलन और नैतिकता पर और अधिक ध्यान देना चाहिए।

रमो़जी राव के कार्यों की सराहना

कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने प्रसिद्ध मीडिया संस्थापक रमो़जी राव की कार्यशैली और योगदान की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि रमो़जी राव का जीवन पत्रकारिता की ईमानदारी, साहस और उत्कृष्टता का प्रतीक है, और आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।

“मीडिया संस्थान केवल पूंजी से नहीं, नैतिक मूल्यों से बनते हैं” — उपराष्ट्रपति

राधाकृष्णन ने कहा कि मीडिया संस्थानों का विकास केवल संसाधनों पर निर्भर नहीं करता, बल्कि उनके पेशेवर मानकों, आचार-संहिता और सामाजिक प्रतिबद्धता पर निर्भर करता है। पत्रकारों से उन्होंने अपील की कि वे अपनी रिपोर्टिंग को राष्ट्रहित, पारदर्शिता और जनसेवा के उद्देश्य से जोड़कर देखें।

लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका पर महत्वपूर्ण संदेश

उपराष्ट्रपति ने कहा कि मीडिया जनता की आवाज़ और लोकतंत्र की आत्मा है। इसलिए उनकी जिम्मेदारी है कि वे चुनाव, शासन, सामाजिक मुद्दों, न्याय और मानवाधिकार जैसे विषयों पर संतुलित और तथ्यात्मक रिपोर्टिंग प्रस्तुत करें।

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