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आरटीओ व एआरटीओ में तैनात 320 कर्मचारियों की नौकरी पर संकट: हटाने की तैयारी से बढ़ी हलचल, दलालों के रैकेट पर गिर सकती है गाज

Published on: November 15, 2025
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जागृत भारत | लखनऊ(Lucknow): राजधानी सहित प्रदेशभर के आरटीओ और एआरटीओ कार्यालयों में बड़ा प्रशासनिक कदम उठने वाला है। स्मार्ट चिप कंपनी के 320 कर्मचारियों को हटाने की तैयारी ने पूरे विभाग में खलबली मचा दी है। यदि यह कार्रवाई लागू होती है, तो ड्राइविंग लाइसेंस (DL) से जुड़ी कई आवश्यक सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं, जिससे आवेदकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

राजधानी के ट्रांसपोर्टनगर आरटीओ में तैनात 28 कर्मचारी और पूरे प्रदेश के कुल 320 कर्मचारी सालों से ड्राइविंग लाइसेंस की प्रोसेसिंग, बायोमेट्रिक, नई डीएल प्रिंटिंग और डिलीवरी जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को संभाल रहे हैं। विभागीय अफसरों का दावा है कि वर्षों से एक ही जगह तैनाती के चलते कई कर्मचारियों की दलालों से सांठगांठ हो गई है, जिसके चलते इन्हें हटाया जाना जरूरी हो गया है।


आरटीओ प्रशासन ने लिखा पत्र, दलालों से सांठगांठ का लगाया आरोप

ट्रांसपोर्टनगर आरटीओ (प्रशासन) संजय तिवारी ने परिवहन आयुक्त किंजल सिंह को पत्र लिखकर इन कर्मचारियों को हटाने की सिफारिश की है। इसके बाद विभाग में हलचल और तेज हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि दलालों का नेटवर्क डीएल से जुड़े कामों में व्यवधान डाल रहा है और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए यह कदम जरूरी है।


कर्मचारी बोले—“हम पर लगाए आरोप बेबुनियाद, आजीविका पर संकट”

दूसरी ओर, कर्मचारी अपने ऊपर लगे आरोपों को पूरी तरह निराधार बता रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों से मात्र 10–12 हजार रुपये वेतन पर काम कर रहे कर्मचारियों पर सांठगांठ के आरोप लगाना गलत है। इन्हें हटाया गया तो सैकड़ों परिवारों के सामने जीविका का संकट खड़ा हो जाएगा।

प्रदेशभर के कर्मचारी इस मुद्दे पर एकजुट होकर परिवहन आयुक्त से मुलाकात की तैयारी में हैं। कुछ कर्मचारियों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर वे धरना-प्रदर्शन भी कर सकते हैं।


दलालों के रैकेट की करेंगे शिकायत, सबूत सौंपने की तैयारी

कर्मचारियों ने यह भी कहा कि यदि अधिकारियों को दलालों के अस्तित्व पर संदेह है, तो वे खुद परिवहन आयुक्त को दलालों की तस्वीरें, वीडियो और उनके सक्रिय नेटवर्क से जुड़े प्रमाण सौंपेंगे। उनका दावा है कि वास्तविक समस्या दलालों की है, लेकिन टारगेट कर्मचारियों को बनाया जा रहा है।

आरटीओ में चल रही इस उठापटक के बीच आवेदक और आम नागरिकों में भी चिंता बढ़ गई है, क्योंकि यह कदम लागू होते ही ड्राइविंग लाइसेंस से जुड़े कार्यों में देरी तय मानी जा रही है।

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