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‘अमेरिका से रिश्ते मजबूत हों, लेकिन रणनीतिक स्वायत्तता से समझौता नहीं’, पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल की दो टूक

Published on: June 30, 2026
Relations with the US should be strengthened.
जागृत भारत,नई दिल्ली : भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच साझेदारी और मजबूत होनी चाहिए, लेकिन यह भारत की रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) की कीमत पर नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति और राष्ट्रीय हित स्वतंत्र होने चाहिए तथा किसी भी वैश्विक शक्ति के दबाव में नहीं आने चाहिए।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए अपने लेख में कंवल सिब्बल ने भारत-अमेरिका संबंधों, रूस, चीन, व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से अपनी राय रखी।

उन्होंने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी आर्थिक, तकनीकी और सैन्य शक्ति अमेरिका के साथ घनिष्ठ संबंध भारत के लिए कई अवसर लेकर आते हैं, लेकिन दोनों देशों के हित हर मुद्दे पर समान नहीं हो सकते। उनके अनुसार, जब दोनों देशों के रणनीतिक हित अलग होंगे, तब भारत पर दबाव बनाए जाने की संभावना भी रहेगी।
कंवल सिब्बल ने कहा कि भारत एक उभरती हुई वैश्विक शक्ति है, जबकि अमेरिका अपनी वैश्विक रणनीति के अनुरूप साझेदार देशों से सहयोग चाहता है। ऐसे में भारत को अपने राष्ट्रीय हितों और विदेश नीति की प्राथमिकताओं को सर्वोपरि रखना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका समय-समय पर भारत और रूस के रक्षा संबंधों को प्रभावित करने का प्रयास करता रहा है। उनके अनुसार, यूक्रेन संकट के दौरान भी अमेरिका चाहता था कि भारत रूस की आलोचना करे, लेकिन भारत ने स्वतंत्र विदेश नीति अपनाते हुए संतुलित रुख बनाए रखा। उन्होंने कहा कि रूस से रक्षा उपकरणों की खरीद भारत की संप्रभु नीति का हिस्सा है और अमेरिका को इसका सम्मान करना चाहिए।
कंवल सिब्बल ने पाकिस्तान-अमेरिका संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अब भी अमेरिका का प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी बना हुआ है और उसे सैन्य सहयोग मिलता रहा है। उनका तर्क था कि अमेरिका भारत से रूस के साथ रक्षा सहयोग कम करने की अपेक्षा करता है, जबकि पाकिस्तान और चीन के बढ़ते रक्षा संबंधों को लेकर उसी प्रकार का दबाव नहीं बनाता।
व्यापार संबंधों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बन चुका है, लेकिन पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में व्यापारिक रिश्तों में तनाव भी देखने को मिला। उन्होंने कहा कि अतिरिक्त टैरिफ और व्यापारिक दबाव की नीति ने द्विपक्षीय व्यापार वार्ताओं को प्रभावित किया।
भारत-चीन संबंधों पर सिब्बल ने कहा कि सीमा विवाद और सुरक्षा चुनौतियों का सामना भारत ने मुख्य रूप से अपने दम पर किया है। उन्होंने माना कि गलवान संघर्ष के दौरान अमेरिका ने कुछ खुफिया जानकारी और सीमित सहायता उपलब्ध कराई थी, लेकिन चीन से जुड़ी जमीनी सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की प्राथमिक जिम्मेदारी भारत की अपनी ही है।
उन्होंने निष्कर्ष में कहा कि भारत को अमेरिका सहित सभी प्रमुख देशों के साथ मजबूत और संतुलित संबंध बनाए रखने चाहिए, लेकिन अपनी विदेश नीति, सुरक्षा और आर्थिक हितों से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं करना चाहिए।

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