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सर्पदंश से मृत बेटे को जिंदा करने का अंधविश्वास: परिजनों ने कब्र से निकाला 12 वर्षीय बच्चे का शव, नीम के पत्तों में दबाकर 4 दिन तक झाड़-फूँक

Published on: October 25, 2025
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जागृत भारत | हाथरस, उत्तर प्रदेश के हसायन क्षेत्र के इटरनी गांव में एक ऐसी हृदय विदारक घटना सामने आई है, जहाँ पुत्र-मोह और अंधविश्वास ने एक परिवार को असहनीय पीड़ा से गुजारा। चार दिन पहले सर्पदंश से मृत 12 वर्षीय कपिल (पुत्र नरेंद्र) को परिजनों ने दफना दिया था, लेकिन किसी के बताने पर कि पानी गांव, मथुरा का बायगीर (झाड़-फूँक करने वाला) उसे जिंदा कर सकता है, परिजनों ने शव को कब्र से बाहर निकाल लिया

4 दिन तक झाड़-फूँक और शरीर की दुर्गति

21 अक्टूबर को शव निकाला: बेटे की साँस लौटने की आस में परिजन इस अंधविश्वास में आ गए। उन्होंने दफनाने के कुछ देर बाद ही 21 अक्तूबर की दोपहर ग्रामीणों की मदद से शव को कब्र से बाहर निकाला और इलाज के लिए मथुरा ले गए।

मथुरा में 23 अक्तूबर तक शव को नीम के पत्तों और उपलों में दबाकर रखा गया और बायगीर से झाड़-फूँक कराई जाती रही। हालांकि, इससे कोई लाभ नहीं हुआ।

शरीर का रंग बदला: 23 अक्तूबर शाम को परिजन शव गांव ले आए। इन चार दिनों में इलाज न मिलने के कारण बच्चे का शव नीला पड़ चुका था

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इलाज में हुई देरी: चिकित्सकों का स्पष्टीकरण

मेहनत-मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले नरेंद्र पर कपिल सबसे छोटे थे। नरेंद्र के मुताबिक, कपिल को सोमवार तड़के करीब साढ़े तीन-चार बजे बाएं हाथ की छोटी अंगुली पर किसी जीव (सर्प) के काटने का एहसास हुआ। सुबह तक उसे गले व पेट में जलन होने लगी।

परिजन सुबह छह बजे उसे लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हसायन पहुंचे, लेकिन इलाज शुरू होने में देरी हुई। चिकित्सकों का कहना है कि संर्पदंश के मामलों में तत्काल अस्पताल ले जाना चाहिए और एंटी वेनम इंजेक्शन चार घंटे के भीतर ही ज्यादा प्रभावी होता है। कपिल के मामले में इलाज शुरू होने में बहुत देर हो चुकी थी, और सुबह आठ बजे चिकित्सक ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पुलिस की सख्ती और कानूनी प्रक्रिया

हसायन पुलिस को इसकी सूचना मिल गई थी। शव गांव आते ही एसएचओ गिरीशचंद्र गौतम फोर्स के साथ गांव पहुंच गए। परिजन व ग्रामीण शव का पोस्टमार्टम कराने में आनाकानी कर रहे थे। पुलिस ने सख्ती की, जिसके बाद 24 अक्तूबर सुबह पोस्टमार्टम कराया गया।

सीओ सिकंदराराऊ, जेएन अस्थाना ने बताया कि सर्पदंश से बच्चे की मौत की सूचना बृहस्पतिवार शाम को मिली थी, और शुक्रवार को पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है।

डॉक्टर की चेतावनी: अंधविश्वास से बचें

सीएमएस जिला अस्पताल, डॉक्टर सूर्यप्रकाश ने इस घटना पर कड़ी चेतावनी जारी की है:

  • सत्य: यदि किसी चिकित्सक ने मृत घोषित कर दिया है तो उसे जिंदा नहीं किया जा सकता
  • सलाह: सर्पदंश की स्थिति में तत्काल अस्पताल पहुंचे और बायगीरों से इलाज न कराएं
  • उपचार: केवल एंटी वेनम वैक्सीन (Anti-venom Vaccine) ही पीड़ित की जान बचा सकती है।

कुछ ग्रामीणों का दावा है कि पिछले सौ वर्षों में गांव में सर्पदंश से कोई मौत नहीं हुई थी, जिसके कारण परिजनों को यकीन था कि उनका बेटा पुन: जिंदा हो सकता है। लेकिन यह दुखद घटना यह बताती है कि अंधविश्वास अक्सर जानलेवा साबित होता है।

सर्पदंश से मृत बेटे को जिंदा करने का अंधविश्वास: परिजनों ने कब्र से निकाला 12 वर्षीय बच्चे का शव, नीम के पत्तों में दबाकर 4 दिन तक झाड़-फूँक

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