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UPPSC : अब मुख्य परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के भी ऑनलाइन मूल्यांकन की तैयारी, आयोग हर पहलू का कर रहा अध्ययन

Published on: December 6, 2025
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जागृत भारत | प्रयागराज(Prayagraj): उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) अब प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षाओं में एक बड़ा परिवर्तन लागू करने की तैयारी में है। परंपरागत तरीके से कॉपियों की जांच के बजाय अब पीसीएस मुख्य परीक्षा (Mains) समेत अन्य भर्तियों की वर्णनात्मक उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन ऑनलाइन माध्यम से करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। आयोग के अनुसार, इस तकनीक से जहां मूल्यांकन की गति बढ़ेगी, वहीं पारदर्शिता भी सुनिश्चित की जा सकेगी।


हरियाणा में आंशिक रूप से शुरू, अब यूपी भी आगे

सूत्रों के मुताबिक, हरियाणा लोक सेवा आयोग पहले ही इसे आंशिक तौर पर लागू कर चुका है। इसके मॉडल को देखते हुए यूपी पीएससी भी उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी कड़ी में —

  • कई तकनीकी सेवा प्रदाताओं ने UPPSC को अपना प्रेजेंटेशन दिया है

  • अब इस मॉडल को अपनाने के लाभ और संभावित दुष्परिणाम दोनों का अध्ययन किया जा रहा है


स्कैन कॉपियों के मूल्यांकन में AI की सहायता

अब तक —

  • वस्तुनिष्ठ (Objective) प्रश्न पत्रों की जांच ऑनलाइन की जाती रही है

  • जबकि वर्णनात्मक (Descriptive) प्रश्न पत्रों का मूल्यांकन कागज पर पारंपरिक तरीके से होता रहा है

प्रस्ताव है कि:

  • परीक्षार्थियों की कॉपियों को स्कैन कर ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा

  • शिक्षक-विशेषज्ञ या AI आधारित सिस्टम मूल्यांकन में भूमिका निभाएंगे

  • किस हद तक AI शामिल होगा — इस पर अभी विचार जारी है


मॉडल आंसर होगा आधार

आयोग के अधिकारियों के अनुसार —

  • हर प्रश्न के लिए विशेषज्ञ पैनल मॉडल आंसर तैयार करेगा

  • उसी के आधार पर ऑनलाइन मूल्यांकन होगा

  • पारंपरिक प्रक्रिया की ही डिजिटल रूप में निरंतरता रहेगी


छोटे स्तर पर पायलट प्रोजेक्ट की संभावना

आयोग सूत्रों ने कहा:

“अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। यदि लागू किया जाता है तो पहले इसे किसी छोटी भर्ती परीक्षा में परीक्षण के तौर पर अपनाया जाएगा।”


हर पहलू का बारीकी से अध्ययन

अध्ययन के मुख्य बिंदु:

  • पूरी तरह AI मूल्यांकन?

  • AI + विशेषज्ञ संयुक्त मूल्यांकन?

  • या केवल कॉपियां ऑनलाइन और मूल्यांकन मानव द्वारा?

  • अन्य आयोगों में मौजूद इस प्रणाली की तुलनात्मक समीक्षा


तेजी और पारदर्शिता — दोनों लक्ष्य

अधिकारियों के अनुसार —

  • परिणाम तेजी से जारी किए जा सकेंगे

  • भेदभाव की शिकायतें कम होंगी

  • समान उत्तर वाले अभ्यर्थियों को भिन्न-भिन्न अंक मिलने की समस्या खत्म होगी

आयोग का दावा है कि यह बदलाव प्रतियोगी परीक्षाओं के पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का कायाकल्प कर सकता है।

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