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UP पंचायत चुनाव में NOTA और प्रत्याशी के नाम की मांग पर आज हाईकोर्ट में अहम सुनवाई

Published on: December 12, 2025
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जागृत भारत | लखनऊ(Lucknow): उत्तर प्रदेश में होने वाले त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर NOTA विकल्प और बैलेट पेपर पर प्रत्याशियों के नाम शामिल करने की मांग को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। मतदाताओं के अधिकारों और समानता के सिद्धांत से जुड़ा यह मामला शुक्रवार को लखनऊ खंडपीठ में सुनवाई के लिए लगा है। याचिका में ग्रामीण और शहरी निकाय चुनावों में अपनाई गई अलग-अलग व्यवस्था को संविधान के विरुद्ध बताया गया है।


नोटा विकल्प और नाम लिखने की मांग पर हाईकोर्ट में सुनवाई

लखनऊ पीठ में दाखिल जनहित याचिका में कहा गया है कि वर्तमान में पंचायत चुनावों के बैलेट पेपर पर केवल चुनाव चिह्न छपता है, प्रत्याशी का नाम नहीं। इससे मतदाताओं को भ्रम होता है और सही उम्मीदवार की पहचान करना मुश्किल हो जाता है।

याचिका शुक्रवार को न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।


ग्रामीण मतदाताओं को NOTA से वंचित किए जाने का आरोप

याची अधिवक्ता सुनील कुमार मौर्य का तर्क है कि शहरी निकायों के चुनाव में नोटा का विकल्प दिया जाता है, लेकिन पंचायत चुनावों में यह सुविधा नहीं है। यह ग्रामीण मतदाताओं के साथ भेदभाव है और संविधान के समानता अधिकार (Article 14) का उल्लंघन करता है।


आयोग का पक्ष: 60 करोड़ मतपत्र छापना मुश्किल

याचिका में एक आरटीआई जवाब शामिल किया गया है जिसमें राज्य निर्वाचन आयोग ने बताया था कि पंचायत चुनावों के लिए करीब 55–60 करोड़ मतपत्र छापने होते हैं। आयोग का कहना है कि इतने कम समय में NOTA और प्रत्याशी का नाम जोड़कर मतपत्र छापना कठिन है।

याची ने इस तर्क को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि प्रशासनिक कठिनाई के आधार पर मौलिक अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता।

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