जागृत भारत | मुंबई/नई दिल्ली : शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में संभावित फूट की अटकलें अब खुलकर सामने आने लगी हैं। पार्टी के नौ लोकसभा सांसदों में से केवल तीन सांसद—अरविंद सावंत, राजाभाऊ वाजे और अनिल देसाई—बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल हुए। बाकी छह सांसदों की गैरमौजूदगी ने उनके पार्टी छोड़ने की चर्चाओं को और बल दे दिया है।
इस बीच, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राज्यसभा सांसद संजय राउत ने संभावित बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला और उन्हें लेकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि सांसद और विधायक के पद स्थायी नहीं होते, लेकिन पार्टी और उसके नेतृत्व के प्रति वफादारी सबसे महत्वपूर्ण होती है।
राउत ने कहा, “बालासाहेब ठाकरे ने हम सभी को अपने बच्चों की तरह संभाला और उद्धव ठाकरे ने हमेशा हमें परिवार का हिस्सा माना। ऐसे में पार्टी छोड़ने वाले लोग गद्दार हैं। हमें लगता है कि गद्दारी उनके खून में है।”
‘ऑपरेशन टाइगर’ पर भी बोले राउत
संजय राउत ने मीडिया में चल रही ‘ऑपरेशन टाइगर’ की चर्चाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि शिवसेना को तोड़ना इतना आसान नहीं है और पार्टी आज भी मजबूती से खड़ी है।
राउत ने दावा किया कि उन्हें जानकारी मिली है कि महाराष्ट्र के कुछ सांसदों को पार्टी छोड़ने के लिए पैसे का लालच दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सांसदों को शुरुआती तौर पर 15 करोड़ रुपये तक की पेशकश की जा रही है। हालांकि, उन्होंने इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रमाण या नाम सार्वजनिक नहीं किया।
उन्होंने कहा, “अगर शिवसेना या तृणमूल कांग्रेस जैसी पार्टियों को इस तरह तोड़ा जाएगा, तो चुनावी लोकतंत्र का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।”
बागी सांसदों को चेतावनी
राउत ने कहा कि मौजूदा सांसद शिवसेना (यूबीटी) के ‘मशाल’ चुनाव चिन्ह और उद्धव ठाकरे की मेहनत के दम पर चुने गए हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के साथ विश्वासघात किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर पहले जैसी घटनाएं दोहराई गईं, तो महाराष्ट्र की जनता और शिवसैनिक चुप नहीं बैठेंगे। जो भी टकराव होगा, उसका सामना किया जाएगा। अब कायरता और ऐसी हरकतें बर्दाश्त नहीं की जाएंगी।”
शिवसेना (यूबीटी) में संभावित टूट की इन खबरों के बीच पार्टी के भीतर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। आने वाले दिनों में सांसदों की अगली राजनीतिक चाल पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
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