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यूपी में बिजली हो सकती है और महंगी: स्मार्ट प्रीपेड मीटर का खर्च जोड़ने की तैयारी, उपभोक्ता परिषद ने खोला मोर्चा

Published on: January 6, 2026
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जागृत भारत | लखनऊ(Lucknow): उत्तर प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं की जेब पर जल्द ही अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। पावर कॉरपोरेशन द्वारा दाखिल वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) प्रस्ताव में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का खर्च शामिल किए जाने से बिजली की दरों में 5 से 6 फीसदी तक बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है। इसके अलावा अन्य खर्च अलग से जोड़ने की भी तैयारी है।

2026-27 के एआरआर में दिखाया गया हजारों करोड़ का खर्च

पावर कॉरपोरेशन ने वर्ष 2026-27 के लिए दाखिल एआरआर प्रस्ताव में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाने का खर्च मार्च 2026 तक करीब 3800 से 4000 करोड़ रुपये बताया है। यदि यह खर्च सीधे टैरिफ में जोड़ा गया, तो अकेले इसी वजह से बिजली की दरों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।

अन्य खर्च और घाटे भी जोड़ने की तैयारी

एआरआर प्रस्ताव में केवल स्मार्ट मीटर का खर्च ही नहीं, बल्कि बिजली कंपनियों के विभिन्न खर्चों और घाटों को भी शामिल किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इन सभी मदों को जोड़ने के बाद उपभोक्ताओं पर और ज्यादा आर्थिक भार पड़ना तय माना जा रहा है।

केंद्र सरकार के आदेशों के खिलाफ प्रस्ताव?

खास बात यह है कि भारत सरकार ने वर्ष 2023 में स्पष्ट आदेश जारी किया था कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर की किसी भी प्रकार की लागत प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं पर नहीं डाली जाएगी। इसके अलावा ऊर्जा मंत्री ने भी विधानसभा में बयान दिया था कि मौजूदा मीटर हटाकर लगाए जाने वाले स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कोई भी लागत सीधे उपभोक्ताओं से नहीं ली जाएगी। इसके बावजूद एआरआर में एक वर्ष का खर्च हजारों करोड़ रुपये दिखाया गया है।

राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद का कड़ा विरोध

मामले की जानकारी मिलते ही राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि पावर कॉरपोरेशन ओपेक्स मॉडल के तहत प्रति स्मार्ट प्रीपेड मीटर प्रति माह उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त भार डालने की कोशिश कर रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

टेंडर लागत बढ़ने पर भी सवाल

अवधेश कुमार वर्मा ने बताया कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर परियोजना के तहत पहले लगभग 18,885 करोड़ रुपये के टेंडर को मंजूरी दी गई थी, जिसे बढ़ाकर करीब 27,342 करोड़ रुपये में कंपनियों को दिया गया। उनका आरोप है कि इस बढ़ी हुई लागत का बोझ अब बिजली उपभोक्ताओं पर डालने का प्रयास किया जा रहा है।

सरकारी आदेशों के उल्लंघन का आरोप

उपभोक्ता परिषद ने साफ कहा है कि एआरआर में किया गया यह प्रस्ताव भारत सरकार के स्पष्ट आदेशों का उल्लंघन है। परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि उपभोक्ताओं पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर का कोई भी आर्थिक भार डाला गया, तो इसका व्यापक स्तर पर विरोध किया जाएगा।

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