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राजा रघुवंशी हनीमून मर्डर केस: गिरफ्तारी के लिखित कारण पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, मामला बड़ी बेंच को भेजने के संकेत

Published on: July 10, 2026
Raja Raghuvanshi Honeymoon Murder Case

जागृत भारत,नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिया है कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को लिखित रूप में कारण बताना अनिवार्य है या नहीं, इस महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न पर वह बड़ी पीठ (लार्जर बेंच) से विचार करा सकता है। गुरुवार को राजा रघुवंशी हनीमून मर्डर केस से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने इस मुद्दे पर मौजूद विरोधाभासी फैसलों पर चिंता जताई।

जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस श्री चंद्रशेखर की पीठ मेघालय सरकार की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को मिली जमानत को चुनौती दी गई है। सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि इस कानूनी प्रश्न पर सुप्रीम कोर्ट की अलग-अलग पीठों के फैसलों में विरोधाभास दिखाई देता है, इसलिए मामले पर बड़ी बेंच से विचार कराए जाने की आवश्यकता पड़ सकती है।

राजा रघुवंशी हनीमून मर्डर केस में सोनम रघुवंशी पर अपने पति की हत्या का आरोप है। हालांकि, निचली अदालत और मेघालय हाईकोर्ट से उसे जमानत मिल चुकी है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट भी हाईकोर्ट के जमानत आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर चुका है। ऐसे में गंभीर अपराध के मामले में तकनीकी आधार पर जमानत दिए जाने को लेकर कानूनी बहस तेज हो गई है।

मेघालय सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को लिखित आधार उपलब्ध कराए गए थे, लेकिन दस्तावेज में टाइपिंग की त्रुटि के कारण भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103 के स्थान पर गलती से धारा 403 लिख दी गई, जबकि ऐसी कोई धारा अस्तित्व में ही नहीं है। उनका तर्क था कि इस टाइपिंग त्रुटि को गिरफ्तारी के कारणों की जानकारी न देने के बराबर मानते हुए जमानत दे दी गई।

इस पर जस्टिस मनोज मिश्रा ने टिप्पणी की कि केवल संबंधित धारा का उल्लेख करना पर्याप्त नहीं है। आरोपी को यह भी स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि उस पर किस अपराध में संलिप्त होने का आरोप है, जैसे कि इस मामले में पति की हत्या का आरोप।

सुनवाई के दौरान जस्टिस मिश्रा ने कहा कि अदालत इस कानूनी प्रश्न पर विस्तार से विचार करेगी और यह भी तय करेगी कि क्या इसे बड़ी पीठ के पास भेजा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अलग-अलग पीठों के विरोधाभासी निर्णयों के कारण कानून की व्याख्या में असंगति उत्पन्न हो रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को तय की है। साथ ही मेघालय सरकार को निर्देश दिया है कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को उपलब्ध कराए गए मूल दस्तावेजों की प्रति भी अदालत में प्रस्तुत की जाए। गौरतलब है कि इससे पहले 3 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य पीठ ने मेघालय हाईकोर्ट द्वारा सोनम रघुवंशी को दी गई जमानत पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया था।


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