जागृत भारत,इस्लामाबाद/नई दिल्ली : भारतीय सेना द्वारा इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (IBG) अवधारणा को लागू करने के बाद पाकिस्तान में इस पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई है। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और रक्षा विश्लेषकों के अनुसार, पाकिस्तान के कुछ रक्षा विशेषज्ञों ने सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर को सलाह दी है कि बदलते युद्ध परिदृश्य को देखते हुए पाकिस्तान को भी भारतीय मॉडल की तर्ज पर अधिक तेज, लचीले और आत्मनिर्भर सैन्य गठन विकसित करने पर विचार करना चाहिए।
रिपोर्टों के मुताबिक, भारत ने हाल ही में अपनी सैन्य संरचना में एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (IBG) प्रणाली को लागू करना शुरू किया है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य सीमाओं पर सैनिकों की त्वरित तैनाती, बेहतर समन्वय और कम समय में प्रभावी सैन्य प्रतिक्रिया सुनिश्चित करना है। खासतौर पर उत्तरी सीमाओं पर बदलती सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए इसे भारतीय सेना के बड़े संगठनात्मक सुधारों में से एक माना जा रहा है।
क्या है इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (IBG)?
इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप को एक ऐसी संयुक्त लड़ाकू इकाई के रूप में विकसित किया गया है, जिसमें युद्ध के लिए आवश्यक लगभग सभी प्रमुख सैन्य क्षमताएं एक ही कमांड के अधीन उपलब्ध रहती हैं। इसे पारंपरिक ब्रिगेड से अधिक सक्षम लेकिन डिवीजन से छोटा सैन्य गठन माना जाता है।
एक सामान्य IBG में लगभग 5,000 सैनिक शामिल हो सकते हैं। इसमें पैदल सेना, टैंक, तोपखाना, इंजीनियरिंग इकाइयां, वायु रक्षा, संचार व्यवस्था, मेडिकल सहायता और रसद (लॉजिस्टिक्स) जैसी सभी आवश्यक क्षमताएं एकीकृत रहती हैं। इससे किसी भी सैन्य अभियान के दौरान अलग-अलग इकाइयों को बाद में जोड़ने की आवश्यकता कम हो जाती है।
पारंपरिक व्यवस्था से कैसे अलग है IBG?
अब तक पारंपरिक सैन्य व्यवस्था में इन्फैंट्री, आर्टिलरी, बख्तरबंद वाहन, इंजीनियरिंग और मेडिकल इकाइयों को अलग-अलग स्थानों से युद्ध क्षेत्र में पहुंचाना पड़ता था। इस प्रक्रिया में समय लगता था और कई स्तरों पर समन्वय की आवश्यकता होती थी।
IBG मॉडल में इन सभी संसाधनों को पहले से ही एकीकृत कर दिया जाता है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि आदेश मिलने के बाद पूरी लड़ाकू इकाई बहुत कम समय में अभियान के लिए तैयार हो सकती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य के तेज गति वाले युद्धों में ऐसी संरचना अधिक प्रभावी साबित हो सकती है।
चीन सीमा पर हुई पहली तैनाती
रिपोर्टों के अनुसार, भारत ने इस नई अवधारणा के तहत अपनी पहली प्रमुख तैनाती चीन के साथ लगने वाली वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के क्षेत्र में की है। बताया जाता है कि 17 माउंटेन स्ट्राइक कोर के अंतर्गत कई नए इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप और एक समर्पित फायर सपोर्ट ग्रुप का गठन किया गया है। इनका उद्देश्य पर्वतीय क्षेत्रों में तेजी से सैन्य कार्रवाई और बेहतर समन्वय सुनिश्चित करना है।
पाकिस्तान में क्यों बढ़ी चिंता?
भारतीय सेना के इस कदम के बाद पाकिस्तान के रक्षा मामलों के जानकारों ने इसे गंभीरता से लिया है। पाकिस्तानी रक्षा विश्लेषक बिलाल खान सहित कुछ विशेषज्ञों ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि पाकिस्तान को भी अपनी सैन्य संरचना की समीक्षा करनी चाहिए।
उनका तर्क है कि यदि भारतीय सेना कम समय में बड़े पैमाने पर सैन्य बल को सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात करने में सक्षम हो जाती है, तो पाकिस्तान को भी अपनी प्रतिक्रिया क्षमता बढ़ाने के लिए समान प्रकार की तेज और लचीली सैन्य इकाइयों पर विचार करना होगा।
कुछ रणनीतिक विश्लेषकों का यह भी कहना है कि बदलते युद्ध स्वरूप में केवल सैनिकों की संख्या पर्याप्त नहीं होती, बल्कि उनकी त्वरित तैनाती, संयुक्त संचालन और निर्णय लेने की गति अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। ऐसे में IBG जैसी अवधारणाएं भविष्य के सैन्य अभियानों में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
बदलते युद्ध का नया मॉडल
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक युद्ध केवल पारंपरिक मोर्चों तक सीमित नहीं रह गए हैं। सीमित समय में सटीक कार्रवाई, संयुक्त सैन्य अभियान और तकनीकी समन्वय अब सैन्य सफलता के प्रमुख आधार बन चुके हैं। इसी कारण दुनिया की कई सेनाएं अपने संगठनात्मक ढांचे में बदलाव कर रही हैं।
हालांकि, पाकिस्तान द्वारा IBG जैसी किसी व्यवस्था को अपनाने को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। फिलहाल यह चर्चा रक्षा विशेषज्ञों और रणनीतिक विश्लेषकों के स्तर तक सीमित है। आने वाले समय में पाकिस्तान की सैन्य नीति में कोई बदलाव होता है या नहीं, इस पर क्षेत्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों की नजर बनी रहेगी।
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