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भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग को लेकर खरगे का मोदी सरकार पर हमला, फीस बढ़ोतरी और वीजा सेवाओं पर भी उठाए सवाल

Published on: July 7, 2026
Regarding the ranking of Indian passport

जागृत भारत,नई दिल्ली : कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भारतीय पासपोर्ट की वैश्विक रैंकिंग को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण भारत की अंतरराष्ट्रीय साख प्रभावित हुई है। साथ ही पासपोर्ट शुल्क में बढ़ोतरी और वीजा सेवाओं की गुणवत्ता को लेकर भी सरकार से सवाल किए।

पासपोर्ट रैंकिंग पर सरकार को घेरा

सोशल मीडिया मंच X पर पोस्ट करते हुए खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2018 के उस बयान का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने भारतीय पासपोर्ट की बढ़ती प्रतिष्ठा की बात कही थी। खरगे ने कहा कि मौजूदा वैश्विक रैंकिंग उन दावों का समर्थन नहीं करती।

उन्होंने दावा किया कि वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के हवाले से भारत की पासपोर्ट रैंकिंग 2013 में 74वें स्थान से जून 2026 में 80वें स्थान पर पहुंच गई है। वहीं, ग्लोबल सिटिजन सॉल्यूशंस के ग्लोबल पासपोर्ट इंडेक्स का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि भारत 2026 में 125वें स्थान पर है।

पासपोर्ट फीस बढ़ाने पर भी सवाल

खरगे ने आरोप लगाया कि सेवाओं में सुधार करने के बजाय सरकार ने पासपोर्ट बनवाना महंगा कर दिया है। उनके अनुसार, सामान्य पासपोर्ट की फीस 1,500 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये कर दी गई है, जबकि तत्काल सेवा का शुल्क 5,000 रुपये तक पहुंच गया है।

पर्यटन और वीजा सेवाओं पर टिप्पणी

कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या अभी तक कोविड-19 महामारी से पहले के स्तर तक नहीं पहुंच सकी है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2019 में 10.93 मिलियन विदेशी पर्यटक भारत आए थे, जबकि 2024 में यह संख्या 9.95 मिलियन रही।

खरगे ने सवाल उठाया कि क्या सरकार एनआरआई (प्रवासी भारतीयों) के आंकड़ों को विदेशी पर्यटकों के आंकड़ों के साथ जोड़कर वास्तविक स्थिति छिपाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने भारत के आधिकारिक वीजा आवेदन पोर्टल की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि वेबसाइट को आधुनिक और उपयोगकर्ता-अनुकूल बनाने की जरूरत है।

सरकार की ओर से प्रतिक्रिया का इंतजार

खरगे ने अपने बयान में कहा कि यदि पासपोर्ट की स्थिति कमजोर है, पर्यटन में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है, वीजा सेवाएं संतोषजनक नहीं हैं और नागरिकों को अधिक शुल्क देना पड़ रहा है, तो सरकार द्वारा बताए जा रहे वैश्विक सम्मान पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

हालांकि, खबर लिखे जाने तक कांग्रेस अध्यक्ष के आरोपों पर केंद्र सरकार या विदेश मंत्रालय की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।


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