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भारत-बांग्लादेश रिश्तों में फिर बढ़ा तनाव, क्या पटरी से उतर रही है नई शुरुआत?

Published on: June 21, 2026
India-Bangladesh relations again

जागृत भारत,ढाका : बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन के बाद भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में सुधार की जो उम्मीदें जगी थीं, वे हालिया घटनाक्रमों के चलते कमजोर पड़ती नजर आ रही हैं। सीमा पर बढ़ते तनाव और कुछ राजनयिक विवादों ने दोनों देशों के संबंधों को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

क्षेत्रीय मामलों के जानकार और ढाका स्थित पत्रकार फैसल महमूद ने अपने एक विश्लेषण में कहा है कि नई दिल्ली और ढाका के बीच संबंधों को नई दिशा देने की कोशिशें हाल के सप्ताहों में कई चुनौतियों का सामना कर रही हैं। उनका मानना है कि दोनों देशों के बीच सकारात्मक माहौल बनने के संकेत जरूर मिले थे, लेकिन कुछ घटनाओं ने इस प्रक्रिया को झटका दिया है।

सीमा पर ‘पुश-इन’ विवाद बना तनाव की वजह

हालिया तनाव का सबसे बड़ा कारण सीमा पार लोगों को भेजने से जुड़ा विवाद माना जा रहा है। बांग्लादेश का आरोप है कि भारत ने कुछ लोगों को उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना सीमा पार भेजा। ढाका का कहना है कि जिन लोगों की नागरिकता और पहचान स्पष्ट नहीं थी, उन्हें स्वीकार करना उसके लिए संभव नहीं था।

इन विवादों के चलते कुछ लोग दोनों देशों की सीमा के बीच स्थित नो-मैन्स लैंड में फंसे रहने को मजबूर हुए। बांग्लादेश इसे अपनी संप्रभुता से जुड़ा मुद्दा मानता है, जबकि भारत इसे अवैध आव्रजन से जुड़ा मामला बताता है।

दिल्ली एयरपोर्ट की घटना से बढ़ी नाराजगी

दोनों देशों के संबंधों में खटास बढ़ाने वाली एक अन्य घटना 15 जून को सामने आई। बांग्लादेशी प्रधानमंत्री के सलाहकार जाहिद-उर-रहमान को दिल्ली पहुंचने पर इमिग्रेशन प्रक्रिया के दौरान कथित रूप से लंबा इंतजार करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने अपनी यात्रा रद्द कर वापस लौटने का फैसला किया।

इस घटना पर बांग्लादेश सरकार ने औपचारिक विरोध दर्ज कराया। विश्लेषकों का मानना है कि ऐसी घटनाएं दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद संवेदनशील मुद्दों को और अधिक जटिल बना देती हैं।

ढाका की चिंताएं और बदलता राजनीतिक माहौल

विशेषज्ञों के अनुसार, बांग्लादेश में भारत को लेकर जनमत में बदलाव देखने को मिल रहा है। राष्ट्रीय संप्रभुता, सम्मान और समान व्यवहार जैसे मुद्दे वहां की राजनीति में अधिक महत्वपूर्ण बनते जा रहे हैं।

इसके साथ ही, शेख हसीना के भारत में रहने का मुद्दा भी समय-समय पर चर्चा में आता रहा है। हालांकि मौजूदा बांग्लादेशी नेतृत्व ने इसे प्रमुख विवाद का विषय नहीं बनाया है, फिर भी यह दोनों देशों के रिश्तों पर असर डालने वाला कारक माना जाता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बांग्लादेश में कुछ राष्ट्रवादी और दक्षिणपंथी राजनीतिक दल भारत के प्रति आलोचनात्मक रुख अपनाते रहे हैं, जिससे सरकार पर भी दबाव बढ़ता है।

दोनों देशों के लिए सहयोग क्यों जरूरी?

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और बांग्लादेश दोनों ही लंबे समय तक तनावपूर्ण संबंधों का जोखिम नहीं उठा सकते। भौगोलिक, आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से दोनों देशों का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है।

भारत के लिए बांग्लादेश क्षेत्रीय संपर्क, सुरक्षा सहयोग और पूर्वोत्तर राज्यों तक बेहतर पहुंच के लिहाज से अहम है। वहीं बांग्लादेश को भारत के साथ व्यापार, ट्रांजिट सुविधाओं और आर्थिक सहयोग से महत्वपूर्ण लाभ मिलता है।

आगे क्या?

विश्लेषकों का मानना है कि हालिया मतभेदों के बावजूद दोनों देशों के पास संबंधों को बेहतर बनाने के पर्याप्त अवसर मौजूद हैं। इसके लिए संवाद, पारदर्शिता और संवेदनशील मुद्दों के समाधान के लिए आपसी विश्वास को मजबूत करना जरूरी होगा। आने वाले महीनों में दोनों सरकारों के कदम यह तय करेंगे कि रिश्ते सुधार की दिशा में आगे बढ़ते हैं या तनाव का दौर और लंबा खिंचता है।


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