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यूपी कैबिनेट बैठक आज: 8 लाख शिक्षकों को मिल सकता है कैशलेस इलाज का बड़ा तोहफा, कई अहम नीतियों पर भी मुहर संभव

Published on: January 29, 2026
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जागृत भारत | लखनऊ(Lucknow): उत्तर प्रदेश सरकार राज्य कर्मचारियों की तर्ज पर शिक्षकों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार को लोकभवन में होने वाली कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलने की संभावना है। इस योजना के तहत प्रदेश के करीब 8 लाख से अधिक शिक्षक, शिक्षामित्र, अनुदेशक और रसोइया लाभान्वित हो सकते हैं।

सरकार इस योजना को आयुष्मान योजना की तरह लागू करने की तैयारी कर रही है, जिसमें इलाज पूरी तरह कैशलेस होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के अवसर पर शिक्षकों के लिए इस सुविधा की घोषणा की थी।

शहरी विकास और पुनर्विकास से जुड़े प्रस्तावों पर भी फैसला संभव

कैबिनेट बैठक में आवास विभाग से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी चर्चा हो सकती है। इसमें ‘उप्र नगर योजना और विकास (विकास शुल्क) उद्ग्रहण, संग्रहण नियमावली, 2026’ और ‘उप्र शहरी पुनर्विकास नीति, 2026’ को मंजूरी मिलने की संभावना है। इसके अलावा लखीमपुर खीरी में नाव पलटने की घटना से प्रभावित ग्रामीणों को आवास उपलब्ध कराने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा सकता है।

स्टांप एवं पंजीकरण विभाग के भवन निर्माण के लिए 9.92 करोड़ रुपये जारी

राज्य सरकार ने स्टांप एवं पंजीकरण विभाग के कार्यालय भवनों के निर्माण कार्य को गति देने के लिए बड़ी वित्तीय स्वीकृति दी है। बुधवार को जारी दो अलग-अलग शासनादेशों के अनुसार प्रदेश के विभिन्न जिलों में निर्माणाधीन उप निबंधक कार्यालयों और रिकॉर्ड रूम के लिए 9.92 करोड़ रुपये की दूसरी किस्त जारी की गई है।

शासनादेश के अनुसार उन्नाव के पुरवा स्थित उप निबंधक कार्यालय तथा चंदौली सदर स्थित उप निबंधक एवं सहायक महानिरीक्षक निबंधन कार्यालय भवन के लिए 2.89 करोड़ रुपये की दूसरी किस्त स्वीकृत की गई है। इन दोनों परियोजनाओं की कुल पुनरीक्षित लागत 5.81 करोड़ रुपये है।

इसके अलावा उन्नाव (सफीपुर, बांगरमऊ), बाराबंकी (रामसनेही घाट), सुलतानपुर (लंभुआ, जयसिंहपुर), प्रतापगढ़ (कुंडा) और बुलंदशहर (खुर्जा) में रिकॉर्ड रूम निर्माण के लिए 7.03 करोड़ रुपये की दूसरी किस्त जारी की गई है। शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जारी धनराशि का उपयोग केवल स्वीकृत कार्यों पर किया जाएगा और निर्माण कार्य निर्धारित मानकों व समय सीमा के अनुसार पूरा किया जाएगा। सरकार का मानना है कि नए भवनों के निर्माण से स्टांप एवं पंजीकरण सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और आम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

बिजली उपभोक्ताओं पर 10% ईंधन अधिभार का विवाद

पॉवर कॉर्पोरेशन द्वारा फरवरी माह में उपभोक्ताओं से 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार शुल्क वसूलने के आदेश जारी किए गए हैं। आदेश जारी होते ही उपभोक्ताओं में विरोध शुरू हो गया है। उपभोक्ता परिषद ने इस आदेश के खिलाफ नियामक आयोग में विरोध प्रस्ताव दाखिल किया है और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने का आरोप लगाया है।

पॉवर कॉर्पोरेशन का कहना है कि नवंबर 2025 में बिजली खरीद की वास्तविक दर 5.79 रुपये प्रति यूनिट रही, जबकि विद्युत नियामक आयोग द्वारा स्वीकृत टैरिफ में यह दर 4.94 रुपये प्रति यूनिट थी। इसी अंतर के आधार पर ईंधन अधिभार शुल्क लगाकर अतिरिक्त वसूली का आदेश जारी किया गया है।

उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा ने नियामक आयोग में दाखिल प्रस्ताव में दावा किया है कि नवंबर जैसे सामान्य मांग वाले महीने में इतनी महंगी बिजली खरीद संदेहास्पद है। उन्होंने बताया कि मई 2025 में जब प्रदेश में भीषण गर्मी और रिकॉर्ड बिजली मांग थी, तब बिजली 4.76 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदी गई थी। परिषद ने नवंबर 2025 में की गई बिजली खरीद की स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच कराने तथा ईंधन अधिभार शुल्क पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

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