जागृत भारत | वाराणसी(Varanasi): जिले में उत्तर प्रदेश ज्वेलर्स एसोसिएशन (UPJA) की स्थानीय इकाई ने शनिवार 10 जनवरी 2026 को बड़ा फैसला लेते हुए बुर्का, घूंघट, मास्क या हेलमेट पहनकर आने वाले ग्राहकों को गहने न बेचने का निर्णय लिया है। व्यापारियों का कहना है कि यह कदम सुरक्षा कारणों से उठाया गया है।
चोरी और ठगी की घटनाओं को बताया वजह
यूपी ज्वेलर्स एसोसिएशन की स्थानीय इकाई का दावा है कि हाल के दिनों में प्रदेश के कई जिलों में चोरी, लूट और ठगी की घटनाएं सामने आई हैं, जिनमें आरोपी चेहरा ढककर वारदात को अंजाम देकर फरार हो गए। ऐसे मामलों में सीसीटीवी फुटेज होने के बावजूद पहचान संभव नहीं हो पाती, जिससे व्यापारी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
दुकानों के बाहर लगाए गए पोस्टर
वाराणसी में यूपीजेए के जिला अध्यक्ष कमल सिंह ने बताया कि इस फैसले के तहत सराफा दुकानों के बाहर पोस्टर लगाए गए हैं, जिन पर साफ लिखा है कि
“मास्क, बुर्का, घूंघट या हेलमेट पहनकर दुकान में प्रवेश वर्जित है।”
जिला अध्यक्ष कमल सिंह का बयान
कमल सिंह ने कहा—
“हम उन ग्राहकों को गहने नहीं बेचेंगे, जिनका चेहरा ढका हुआ हो। यदि कोई चेहरा ढककर अपराध करता है तो उसकी पहचान करना संभव नहीं होता। यह फैसला केवल हमारी सुरक्षा के लिए है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई ग्राहक हिजाब पहनकर आता है, तो दुकान में प्रवेश करते समय चेहरा खोलना होगा, ताकि पहचान सुनिश्चित की जा सके।
प्रदेश स्तर पर लागू हो रहा नियम
यूपी ज्वेलर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष सत्य नारायण सेठ ने बताया कि वाराणसी ही नहीं, बल्कि झांसी समेत प्रदेश के कई जिलों में सराफा दुकानों के बाहर इसी तरह के पोस्टर लगाए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा—
“वाराणसी में हजारों ज्वेलरी शॉप हैं। हर कोई चेहरा ढककर आने वाले लोगों से परेशान है। यह किसी धर्म के खिलाफ नहीं, बल्कि व्यापारियों की सुरक्षा का मामला है।”
धर्म से कोई विरोध नहीं: एसोसिएशन
प्रदेश अध्यक्ष ने यह भी साफ किया कि संगठन किसी धर्म या समुदाय का विरोध नहीं कर रहा है।
उन्होंने कहा—
“मुस्लिम ग्राहक बुर्का पहनकर आ सकते हैं, लेकिन दुकान में प्रवेश से पहले चेहरा दिखाना जरूरी होगा, ताकि पहचान सुनिश्चित हो सके।”
सराफा व्यापारी शाहिद ने जताया विरोध
वहीं, लोहत क्षेत्र के सराफा व्यापारी शाहिद ने इस फैसले का विरोध किया। उन्होंने कहा कि
“बुर्का पहनने वाली महिलाओं को दुकान में प्रवेश से रोकना गलत है। इससे ग्राहक दूर हो जाएंगे। किसी महिला से बुर्का हटाने को कहना अपमानजनक है।”
उन्होंने यह भी कहा कि बुर्का पहनकर चोरी की घटनाएं अपवाद हैं, जैसे कि वह घटना जिसमें बिहार के मुख्यमंत्री द्वारा एक महिला का बुर्का हटाने का मामला सामने आया था।
महिला कर्मचारी के जरिए पहचान की सलाह
शाहिद ने सुझाव दिया कि यदि सुरक्षा की चिंता है, तो
“दुकान में मौजूद महिला कर्मचारी महिला ग्राहक का चेहरा देख सकती है, लेकिन किसी पुरुष कर्मचारी द्वारा बुर्का हटाने को कहना उचित नहीं है।”
सरकारी वकील ने फैसले को बताया सही
सरकारी अधिवक्ता राणा संजीव सिंह ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि
“यह कोई गलत कार्य नहीं है। हाल ही में सोशल मीडिया और मीडिया में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां बुर्का पहनकर चोरी की गई और पहचान नहीं हो सकी।”
उन्होंने कहा—
“हर व्यक्ति और व्यवसायी को अपनी सुरक्षा का अधिकार है। इसमें कुछ भी गलत नहीं है।”
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