जागृत भारत | लखनऊ(Lucknow): उत्तर प्रदेश में इस वर्ष नई आलू फसल की रिकॉर्ड पैदावार हुई है। इसके साथ पंजाब, पश्चिम बंगाल, बिहार और मध्य प्रदेश में भी उत्पादन अधिक रहने के कारण बाजारों में आलू की बेहिसाब आवक हो रही है। नतीजतन, थोक बाजारों में आलू की कीमतें औसत से काफी नीचे चल रही हैं।
कम मांग और ज्यादा आपूर्ति बनी गिरावट की वजह
प्रदेश में भरपूर उत्पादन के साथ ही पड़ोसी राज्यों से घटी मांग ने नए आलू के भाव को नीचे धकेल दिया है। वर्तमान में आलू का थोक रेट 900 से 1000 रुपये प्रति क्विंटल तक है, जिससे किसानों के लिए लागत निकाल पाना भी मुश्किल हो गया है।
कोल्ड स्टोर में पड़ा है पुराना आलू
कोल्ड स्टोरों में अभी भी पिछले सीजन का आलू बड़ी मात्रा में भंडारित है। आम तौर पर शीतगृहों को 31 अक्टूबर तक खाली करने का निर्देश होता है, लेकिन इस सीजन में 30 नवंबर तक की मोहलत दी गई, फिर भी—
आगरा
फिरोजाबाद
फर्रूखाबाद
कन्नौज
जिलों में लगभग 10% आलू अभी भी स्टोर में बचा है। पुराने आलू का स्टॉक + नया आलू बाजार में आते ही भाव और ज्यादा टूट गए।
विभिन्न बाजारों में भाव
रविवार को थोक कीमतें इस प्रकार रहीं—
फर्रुखाबाद: 900 रुपये/क्विंटल
हाथरस: 840 रुपये/क्विंटल
छिबरामऊ: 940 रुपये/क्विंटल
कन्नौज: 950 रुपये/क्विंटल
पिछले वर्षों की तुलना में भारी गिरावट
नवंबर 2024 में औसतन दाम: 2122 रुपये/क्विंटल
नवंबर 2025 में औसतन दाम: 1274 रुपये/क्विंटल
यानी किसानों को लगभग 40% तक कम भाव मिल रहे हैं।
लागत बढ़ी, पर दाम आधे रह गए
शीतगृह में आलू रखने वाले किसानों का खर्च breakdown:
शीतगृह किराया: 250 रुपये
बोरा: 100 रुपये
मजदूरी व परिवहन: 100 रुपये
➡ कुल लागत: 1500+ रुपये प्रति क्विंटल
➡ मौजूदा बिक्री: 1000 रुपये से भी कम
नतीजतन किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
किसान बोले— बीज महंगा, दाम घटे
“बीज 2500 से 3000 रुपये प्रति क्विंटल मिला था।
अब 1000 रुपये से कम में बेचना मजबूरी है।”
— अरुण सिंह, प्रगतिशील किसान, फिरोजाबाद
पूर्वांचल में प्रसंस्करण इकाइयों की कमी
“यहाँ आलू प्रसंस्करण इकाइयाँ नहीं हैं।
अगर लग जाएँ तो आलू, टमाटर, शकरकंद किसानों को बहुत लाभ मिलेगा।”
— चंद्रशेखर यादव, प्रगतिशील किसान, जौनपुर
सरकार सक्रिय, रिपोर्ट मांगी गई
उद्यान विभाग ने सभी जिला उद्यान अधिकारियों को निर्देश दिया है कि—
कोल्ड स्टोर्स का निरीक्षण हो
कितनी मात्रा में पुराना आलू शेष है उसकी रिपोर्ट दी जाए
“उपलब्धता के अनुसार आगे की रणनीति बनाई जाएगी।”
— डॉ. राजीव वर्मा, कार्यवाहक उप निदेशक (आलू)
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