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झारखंड के बाद यूपी का ‘जामताड़ा’: फर्रुखाबाद के सात गांव बने साइबर ठगी का गढ़, चार राज्यों की पुलिस कर चुकी है छापेमारी

Published on: January 3, 2026
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जागृत भारत | फर्रुखाबाद(farrukhabad): जिले के फतेहगढ़ क्षेत्र में स्थित अमृतपुर और राजेपुर थाना क्षेत्र के सात गांव अब साइबर अपराध के नए गढ़ के रूप में सामने आए हैं। कभी झारखंड का जामताड़ा साइबर ठगी के लिए कुख्यात था, लेकिन अब उत्तर प्रदेश में फर्रुखाबाद के ये गांव उसी तर्ज पर पहचान बना चुके हैं। लगातार सामने आ रही साइबर ठगी की घटनाओं के बाद इलाके को ‘यूपी का जामताड़ा’ कहा जाने लगा है।

चार राज्यों की पुलिस कर चुकी है छापेमारी

इन गांवों से जुड़े साइबर फ्रॉड के मामलों में राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली और हरियाणा की पुलिस टीमें कई बार छापेमारी कर चुकी हैं। अलग-अलग राज्यों से दर्ज मामलों की जांच में यह सामने आया कि ठगी का नेटवर्क फर्रुखाबाद के इन गांवों से संचालित हो रहा है।

जस्ट डायल एप के जरिए रची जा रही ठगी की साजिश

जांच में सामने आया है कि साइबर ठग जस्ट डायल एप का इस्तेमाल कर ट्रांसपोर्ट कंपनियों के नाम से फर्जी और कूट रचित दस्तावेज तैयार करते हैं। ये दस्तावेज व्हाट्सएप के माध्यम से पीड़ितों को भेजे जाते हैं और ट्रेडिंग या माल ढुलाई के नाम पर अंतरजनपदीय स्तर पर लाखों रुपये की ठगी की जाती है।

इन सात गांवों से संचालित हो रहा है रैकेट

साइबर ठगी का यह संगठित रैकेट अमृतपुर के गांव नगला हूसा और राजेपुर के कमालुद्दीनपुर, राजेपुर राठौरी, हरिहरपुर, सतरा, दहेलिया और वीरपुर गांवों से संचालित हो रहा है। इन गांवों के कई युवक इस गिरोह से जुड़े हुए हैं।

महिलाओं और युवतियों की भी मिली संलिप्तता

जांच में यह भी सामने आया है कि इस साइबर ठगी नेटवर्क में केवल युवक ही नहीं, बल्कि महिलाएं और युवतियां भी शामिल हैं। ये लोग तकनीकी साधनों के जरिए घर बैठे ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।

पक्के मकान नहीं, लेकिन लग्जरी गाड़ियां और महंगे फोन

स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ ऐसे युवक हैं जिनके पास रहने के लिए पक्के मकान तक नहीं हैं, लेकिन उनके पास लग्जरी वाहन और महंगे मोबाइल फोन मौजूद हैं। कई आरोपी नगद भुगतान पर बाइक और वाहन खरीदते हैं, जबकि आम लोग फाइनेंस के जरिए वाहन लेते हैं, जिससे उनकी संदिग्ध आर्थिक स्थिति उजागर होती है।

पहले भी दर्ज हो चुके हैं साइबर ठगी के मुकदमे

विगत वर्ष साइबर थाने के तत्कालीन निरीक्षक राघवेंद्र तिवारी ने अमृतपुर के नगला हूसा गांव निवासी आशीष कुमार यादव, गोविंद कश्यप, आकाश यादव, प्रदीप शर्मा, मोहित यादव, पवनीश यादव और सचिन सिंह के खिलाफ साइबर ठगी का मुकदमा दर्ज कराया था। इन मामलों में ठगी के ठोस साक्ष्य सामने आए थे।

अप्रैल 2024 में तीन आरोपी गिरफ्तार

पांच अप्रैल 2024 को राजेपुर के अंबरपुर निवासी जयनेंद्र सिंह, अमृतपुर के मिया पट्टी निवासी संजीव कुमार उर्फ सनी और फतेहगढ़ के मुहल्ला नेकपुर चौरासी निवासी गजेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया गया था। इन आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, एटीएम कार्ड, फर्जी बिल वाउचर, पैन कार्ड, विभिन्न प्रकार के क्यूआर कोड और 87 हजार रुपये नकद बरामद हुए थे।

दिसंबर 2025 में एक और गिरफ्तारी

इसके अलावा 30 दिसंबर 2025 को राजेपुर के गांव भुड़िया भेड़ा निवासी विशाल त्रिवेदी उर्फ सुभनीत को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। पुलिस के अनुसार वह भी साइबर ठगी नेटवर्क का सक्रिय सदस्य था।

सात गांव पुलिस की रडार पर

साइबर थानाध्यक्ष राजेश कुमार ने बताया कि अमृतपुर और राजेपुर क्षेत्र के सातों गांव पुलिस की रडार पर हैं। लगातार निगरानी की जा रही है और अब तक आठ साइबर ठगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। पुलिस का कहना है कि पूरे रैकेट को ध्वस्त करने के लिए अभियान जारी है।

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