जागृत भारत | उन्नाव(Unnao): जिले में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते आवारा कुत्तों के आतंक से परेशान लोगों को जल्द ही बड़ी राहत मिलने वाली है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुपालन में उन्नाव के पशु चिकित्सालय परिसर में उत्तर प्रदेश का पहला पशु जन्म नियंत्रण (एबीसी) सेंटर स्थापित किया जा रहा है। इस सेंटर के शुरू होने से आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के साथ-साथ उनके इलाज, टीकाकरण, पहचान और निगरानी की व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल हो जाएगी।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा एबीसी सेंटर
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी (सीवीओ) डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि एबीसी सेंटर को आधुनिक तकनीक और संसाधनों से सुसज्जित किया जा रहा है। यहां
प्रशिक्षित पशु चिकित्सकों
पैरावेट स्टाफ
सहायक कर्मियों
की तैनाती की जाएगी। नसबंदी के लिए अत्याधुनिक ऑपरेशन थिएटर, ऑपरेशन के बाद के लिए रिकवरी वार्ड, आवश्यक दवाइयां और चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही आवारा कुत्तों को रेबीज समेत अन्य आवश्यक टीके लगाए जाएंगे, जिससे मानव-पशु संघर्ष और जानलेवा बीमारियों के खतरे को कम किया जा सके।
माइक्रोचिपिंग से हर कुत्ते की बनेगी डिजिटल पहचान
एबीसी सेंटर की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता माइक्रोचिपिंग प्रणाली होगी। सेंटर में लाए जाने वाले प्रत्येक आवारा कुत्ते के शरीर में माइक्रोचिप लगाई जाएगी।
इस माइक्रोचिप के माध्यम से
कुत्ते की पहचान
नसबंदी की स्थिति
टीकाकरण का रिकॉर्ड
स्वास्थ्य से जुड़ी पूरी जानकारी
एक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज की जाएगी। इससे किसी भी कुत्ते का पूरा विवरण एक क्लिक पर उपलब्ध हो सकेगा।
सीवीओ डॉ. विनोद कुमार के अनुसार, एबीसी योजना का उद्देश्य केवल कुत्तों की संख्या घटाना नहीं, बल्कि पशु कल्याण और मानव सुरक्षा को संतुलित रूप से सुनिश्चित करना है। डिजिटल रिकॉर्ड से इलाज और निगरानी में पारदर्शिता आएगी।
पहली बार काटने पर 10 दिन निगरानी, दूसरी बार पर आजीवन कैद
कुत्तों के काटने की घटनाओं को लेकर भी एबीसी सेंटर में स्पष्ट और सख्त नियम तय किए गए हैं।
यदि कोई कुत्ता पहली बार किसी व्यक्ति को काटता है, तो उसे 10 दिन के लिए एबीसी सेंटर में रखा जाएगा।
इस अवधि में उसके स्वभाव और व्यवहार की निगरानी की जाएगी।
इसके बाद उसकी नसबंदी, टीकाकरण और माइक्रोचिपिंग कर उसे उसी क्षेत्र में छोड़ा जाएगा, जहां से उसे पकड़ा गया था।
यदि कुत्ता पालतू है, तो उसके मालिक को मेडिकल सर्टिफिकेट प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा।
वहीं, यदि कोई कुत्ता दूसरी बार किसी व्यक्ति को काटता है, तो उसे आजीवन एबीसी सेंटर में रखा जाएगा। ऐसे कुत्ते को तब तक बाहर नहीं छोड़ा जाएगा, जब तक कोई व्यक्ति या संस्था उसे गोद नहीं लेती।
डिजिटल डाटा से बनेगी भविष्य की ठोस कार्ययोजना
सीवीओ डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि कुत्तों का डिजिटल डाटा तैयार होने से
जिले में आवारा कुत्तों की वास्तविक संख्या का सही आकलन हो सकेगा
यह पता चलेगा कि किस क्षेत्र में कितने कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण हो चुका है
प्रशासन को निगरानी और भविष्य की योजना बनाने में आसानी होगी
इससे न सिर्फ रेबीज जैसी बीमारियों पर नियंत्रण होगा, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
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