जागृत भारत | लखनऊ(Lucknow): उत्तर प्रदेश सरकार ने निर्यात विकास प्रोत्साहन योजना के तहत दी जाने वाली वित्तीय सहायता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी की है। इस फैसले से खासतौर पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग (एमएसएमई) क्षेत्र के निर्यातकों को बड़ा लाभ मिलेगा।
प्रचार और विज्ञापन खर्च पर अब मिलेंगे एक लाख रुपये
सरकार ने उत्पादों के प्रचार-प्रसार, विज्ञापन, कैटलॉग और वेबसाइट निर्माण जैसे कार्यों पर मिलने वाली सहायता राशि को 75 हजार रुपये से बढ़ाकर **एक लाख रुपये प्रति निर्यातक प्रति वर्ष** कर दिया है। इससे निर्यातकों को अपने उत्पादों को वैश्विक बाजार में बेहतर तरीके से पेश करने में मदद मिलेगी।
विदेशी खरीदारों को सैंपल भेजने पर दो लाख रुपये तक सहायता
विदेशी खरीदारों को उत्पादों के नमूने भेजने में होने वाले खर्च पर अब **दो लाख रुपये प्रति निर्यातक प्रति वर्ष** तक की सहायता दी जाएगी। पहले यह सीमा एक लाख रुपये थी, जिसे दोगुना कर दिया गया है।
विदेशी मेलों और प्रदर्शनी में भागीदारी पर मदद
निर्यात प्रोत्साहन विभाग के अनुसार, एमएसएमई निर्यातकों को विदेशी मेला और प्रदर्शनी में भाग लेने पर स्टॉल के वास्तविक व्यय का **75 प्रतिशत**, अधिकतम **3.25 लाख रुपये** तक दिया जाएगा। इसके अलावा हवाई यात्रा के लिए **1.25 लाख रुपये** की अलग से सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
गुणवत्ता प्रमाणन के लिए 25 लाख रुपये तक सहायता
गुणवत्ता नियंत्रण योजना के तहत अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (आईएसओ), भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) और अन्य मानकों के प्रमाणीकरण पर होने वाले खर्च के लिए **25 लाख रुपये प्रति निर्यातक प्रति वर्ष** तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी। इसमें ऊनी उत्पादों के लिए वूलमार्क, सोने के आभूषणों के लिए हॉलमार्क, खाद्य सुरक्षा के लिए एचएसीसीपी और विद्युत उपकरणों के लिए सीई मार्क जैसे प्रमाणन शामिल हैं।
ट्रेड फेयर और बायर-सेलर मीट को भी मिलेगा प्रोत्साहन
सरकार ने विदेशों में आयोजित ट्रेड फेयर और बायर-सेलर मीट की आयोजक संस्थाओं को कुल व्यय का **75 प्रतिशत**, अधिकतम **तीन करोड़ रुपये** तक सहायता देने का निर्णय लिया है। वहीं, देश में आयोजित अंतरराष्ट्रीय स्तर के व्यापार मेलों के लिए आयोजक संस्था को कुल व्यय का 75 प्रतिशत, अधिकतम **एक करोड़ रुपये** तक की मदद मिलेगी। इसके साथ ही वर्चुअल ट्रेड फेयर के आयोजन पर भी **25 लाख रुपये** तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी।
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