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यूपी: बिजली संशोधन विधेयक और निजीकरण का वित्तीय पैकेज लाने की तैयारी में केंद्र सरकार, कर्मचारी बोले—किसी भी सूरत में मंजूर नहीं

Published on: January 15, 2026
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जागृत भारत | लखनऊ(Lucknow): उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में बिजली व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी की जा रही है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने दावा किया है कि केंद्र सरकार संसद के आगामी बजट सत्र में बिजली (संशोधन) विधेयक 2025 और बिजली के निजीकरण से जुड़ा एक वित्तीय पैकेज पेश करने की तैयारी में है। कर्मचारियों का कहना है कि यह प्रस्ताव पूरी तरह बिजली के निजीकरण की दिशा में उठाया गया कदम है, जिसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

संसदीय समिति की बैठक में लिया गया अहम निर्णय

संघर्ष समिति के अनुसार, 18 दिसंबर को बिजली के मामलों की संसदीय समिति की बैठक हुई थी, जिसकी अध्यक्षता केंद्रीय विद्युत मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने की थी। इसी बैठक में यह निर्णय लिया गया कि बिजली (संशोधन) विधेयक 2025 को संसद के बजट सत्र में पारित कराने का प्रयास किया जाएगा। समिति का मानना है कि यह विधेयक उपभोक्ताओं और बिजली कर्मचारियों दोनों के हितों के खिलाफ है।

निजीकरण के लिए तीन विकल्पों वाला वित्तीय पैकेज तैयार

संघर्ष समिति ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित वित्तीय पैकेज के तहत प्रदेश सरकारों को तीन विकल्प दिए जाएंगे, जो सभी किसी न किसी रूप में बिजली वितरण के निजीकरण से जुड़े हैं।

पहला विकल्प: 51 प्रतिशत इक्विटी बिक्री और पीपीपी मॉडल

पहले विकल्प के तहत राज्य के विद्युत वितरण निगमों की 51 प्रतिशत इक्विटी बेचने का प्रस्ताव है। इसके बाद इन निगमों को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत संचालित किया जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि इससे सरकार का नियंत्रण लगभग समाप्त हो जाएगा।

दूसरा विकल्प: 26 प्रतिशत इक्विटी बिक्री, प्रबंधन निजी हाथों में

दूसरे विकल्प में विद्युत वितरण निगमों की 26 प्रतिशत इक्विटी बेची जाएगी, लेकिन पूरा प्रबंधन निजी क्षेत्र के हाथों में सौंप दिया जाएगा। संघर्ष समिति का कहना है कि यह भी प्रत्यक्ष रूप से निजीकरण ही है, जिससे कर्मचारियों की सेवा शर्तें और उपभोक्ताओं के हित प्रभावित होंगे।

तीसरा विकल्प: स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टिंग

तीसरे विकल्प के तहत विद्युत वितरण निगमों को स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध (एनलिस्ट) करने का प्रस्ताव है। समिति का कहना है कि इससे निजी निवेशकों का दखल बढ़ेगा और सार्वजनिक क्षेत्र की मूल भावना समाप्त हो जाएगी।

कर्मचारियों का ऐलान: किसी भी विकल्प को नहीं करेंगे स्वीकार

विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने साफ कहा है कि वित्तीय पैकेज की तीनों शर्तों का एक ही उद्देश्य है—बिजली का निजीकरण। बिजली कर्मचारी संगठन इन सभी प्रस्तावों का पुरजोर विरोध करेंगे और इन्हें लागू नहीं होने देंगे।

3 फरवरी की बैठक में ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिए जाने की संभावना

संघर्ष समिति ने बताया कि 3 फरवरी को बिजली के मामलों की संसदीय समिति की एक और महत्वपूर्ण बैठक प्रस्तावित है। उम्मीद जताई जा रही है कि इसी बैठक में बिजली (संशोधन) विधेयक 2025 और वित्तीय पैकेज के ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा, ताकि इन्हें संसद के इसी बजट सत्र में पेश किया जा सके।

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