जागृत भारत | लखनऊ(Lucknow): लखनऊ में फर्जी मार्कशीट और डिग्री रैकेट का भंडाफोड़ होने के बाद कई चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। पुलिस जांच में पता चला है कि आरोपी सिर्फ फर्जी डिग्री बेचने तक सीमित नहीं थे, बल्कि छात्रों की जरूरत के मुताबिक पूरी तरह कूटरचित मार्कशीट और डिग्रियां तैयार करते थे, ताकि किसी को शक न हो।
पुलिस के मुताबिक, गिरोह पहले छात्र-छात्राओं की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की असली मार्कशीट लेता था। इसके बाद उसी पैटर्न पर सेकेंड डिवीजन, फर्स्ट डिवीजन या अधिक अंकों के साथ ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन और यहां तक कि पीएचडी तक की फर्जी मार्कशीट और डिग्रियां तैयार की जाती थीं। बोर्ड और यूनिवर्सिटी का रजिस्ट्रेशन नंबर, रोल नंबर और अन्य विवरण जानबूझकर समान रखे जाते थे, ताकि दस्तावेज असली लगें।
फर्जी ऑनलाइन परीक्षा का भी नाटक
जांच में सामने आया है कि आरोपी छात्रों को डिग्री देने से पहले फर्जी ऑनलाइन परीक्षा भी कराते थे। निजी ऑनलाइन एग्जाम सेंटर किराए पर लेकर प्रतीकात्मक परीक्षाएं आयोजित की जाती थीं, जिससे छात्रों को लगता था कि पूरी प्रक्रिया वैध है और किसी तरह की धोखाधड़ी नहीं हो रही।
25 यूनिवर्सिटी की डिग्रियां, 15 हजार से 4 लाख तक रेट
गिरोह देश की करीब 25 नामी-गिरामी यूनिवर्सिटियों के नाम पर फर्जी डिग्रियां तैयार करता था। बीए, एमए, बीटेक, बीसीए, एमसीए, एमबीए से लेकर पीएचडी तक की डिग्रियां 15 हजार से लेकर 4 लाख रुपये तक में बेची जाती थीं। कीमत यूनिवर्सिटी और कोर्स की श्रेणी के अनुसार तय होती थी।
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देशभर में फैला नेटवर्क
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि यह नेटवर्क उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था, बल्कि दिल्ली, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर राज्यों तक फैला हुआ था। जरूरतमंद युवाओं को बिना पढ़ाई और मेहनत के डिग्री दिलाने का लालच देकर उन्हें इस जाल में फंसाया जाता था।
2021 से सक्रिय, 1500 से ज्यादा लोग शामिल
पुलिस का अनुमान है कि यह गिरोह वर्ष 2021 से सक्रिय था और अब तक करीब 1500 से अधिक लोगों को फर्जी डिग्रियां बेच चुका है। इस अवैध कारोबार का कुल टर्नओवर लगभग 15 करोड़ रुपये आंका जा रहा है। बरामद दस्तावेजों से साफ है कि यह रैकेट लंबे समय से योजनाबद्ध तरीके से संचालित हो रहा था।
छापेमारी में भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस ने 25 विश्वविद्यालयों के नाम पर तैयार की गई 923 फर्जी डिग्रियां और मार्कशीट बरामद की हैं। इसके अलावा 15 विश्वविद्यालयों की कूटरचित मुहरें, विशेष प्रकार का डिग्री पेपर, 6 लैपटॉप, हार्ड डिस्क, प्रिंटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए गए हैं।
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पूछताछ में यह भी सामने आया है कि फर्जी डिग्री लेने वाले कई लोग निजी कंपनियों में नौकरी हासिल कर चुके हैं। पुलिस अब ऐसे लोगों की सूची तैयार कर रही है और उनके खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
कैफे से हुआ खुलासा, तीन आरोपी गिरफ्तार
लखनऊ पुलिस ने 21 दिसंबर को गोमती नगर स्थित एक कैफे में छापेमारी कर इस फर्जी डिग्री रैकेट का खुलासा किया। पुलिस ने पूराकलंदर अयोध्या निवासी सत्येंद्र द्विवेदी (32), बीघापुर उन्नाव निवासी अखिलेश कुमार (44) और ईसानगर लखीमपुर खीरी निवासी सौरभ शर्मा (35) को गिरफ्तार किया है।
पुलिस के अनुसार, सत्येंद्र द्विवेदी इस गिरोह का सरगना है। फिलहाल नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान की जा रही है और जल्द ही और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।
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