जागृत भारत | कुशीनगर(Kushinagar): जिले में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। वर्षों से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षामित्र अश्विनी मिश्रा (47) ने बुधवार को पडरौना में ट्रेन के आगे कूदकर आत्महत्या कर ली। मौत से पहले उन्होंने चार पन्नों का सुसाइड नोट और शिक्षकों के एक व्हाट्सऐप ग्रुप में भावुक संदेश भेजकर अपनी पीड़ा व्यक्त की थी।
उनकी मौत की खबर मिलते ही जिले भर से पहुँचे सैकड़ों शिक्षक अंतिम संस्कार में फफक पड़े। साथ पढ़ाने वाले एक शिक्षक तो रोते-रोते टूट गए।
सुसाइड नोट में लिखा— “कर्ज चुका चुका हूं, फिर भी खत्म नहीं होता… अब मरने के अलावा रास्ता नहीं”
अश्विनी मिश्रा ने अपने सुसाइड नोट में लिखा—
“मैंने सूद पर कुछ पैसे लिए थे। कई गुना देने के बाद भी कर्ज खत्म नहीं हुआ। सूदखोर घनश्याम वर्मा ब्याज पर ब्याज जोड़ रहा है। एक बार पकड़कर मार चुका है और हमेशा जान से मारने की धमकी देता है। जहर देने की बात तक कर चुका है। उसके हाथों मरने से बेहतर है कि मैं खुद मर जाऊं… मेरी मौत का जिम्मेदार यही सूदखोर है।”
उन्होंने आगे शासन-प्रशासन से परिवार को न्याय दिलाने और सूदखोर के खिलाफ कार्रवाई की अपील की।
साथ ही लिखा— जमीन खरीदने व कर्ज के मामलों में भी हुआ धोखा
सुसाइड नोट के अन्य पन्नों में अश्विनी ने दो लोगों पर आर्थिक धोखाधड़ी के आरोप लगाए—
सुभाष प्रसाद पर आरोप
– जमीन खरीदने के लिए 4.50 लाख रुपये दिए
– न जमीन मिली, न पैसा वापस
– गवाहों के नाम भी लिखे
– प्रशासन से परिवार को पैसा दिलाने की अपील की
केशरी पांडे उर्फ सोनू पर आरोप
– अपनी जमीन लिखाने के बाद 3 लाख का चेक दिया
– चेक बाउंस हुआ
– मोबाइल बंद कर लिया
– पैसा न लौटाने की शिकायत
व्हाट्सऐप ग्रुप पर अंतिम संदेश— “मेरे क्रियाकर्म में साथ देना”
मौत से कुछ घंटे पहले अश्विनी ने शिक्षकों के व्हाट्सऐप ग्रुप में लिखा—
“मैं जिंदगी से हार चुका हूं। आप लोगों से विनती है कि मेरे परिवार की मदद करें और मेरे अंतिम संस्कार में साथ आएं।”
इस संदेश ने सभी को दहला दिया।

पूरा मामला: वेतन कटने के बाद बिगड़े हालात, कर्ज में डूबते चले गए
अहिरौली बाजार थाना क्षेत्र के बलुआ गांव निवासी अश्विनी 2006 से शिक्षामित्र थे।
2015 में समायोजन के बाद उनका वेतन बढ़कर 39 हजार हुआ था और वे विशुनपुरा ब्लॉक के कंपोजिट विद्यालय, परखना में पढ़ाते थे।
परंतु 2017 में समायोजन रद्द होने के बाद वेतन घटकर 10 हजार रुपये रह गया।
इसी के बाद उनकी आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती गई—
✔ कम वेतन और परिवार का खर्च
✔ बच्चों की पढ़ाई
✔ किराये के कमरे का खर्च
✔ बढ़ते कर्ज और सूदखोरी की मार
परिजन बताते हैं कि बुधवार सुबह वह स्कूल के लिए निकले, लेकिन रेलवे ट्रैक पर पहुँचकर ट्रेन के सामने कूद गए।
“अगर वह शिक्षामित्र नहीं होते, तो आज जिंदा होते” — साथी शिक्षक
अंतिम संस्कार में पहुँचे साथी शिक्षक रविभूषण फफककर रो पड़े। उन्होंने कहा—
“अश्विनी अपने बच्चों की पढ़ाई को लेकर परेशान रहते थे। 10 हजार में घर-परिवार चल नहीं रहा था। मानदेय बढ़ने की उम्मीद में कर्ज ले लिया था। उनके साथ धोखाधड़ी भी हो गई। अगर वह शिक्षामित्र नहीं होते तो शायद आज जिंदा होते।”
उन्होंने बताया—
– 14 साल का बेटा केंद्रीय विद्यालय में पढ़ता है
– 10 साल की बेटी पाखी प्राइवेट स्कूल में
– वह रसोइयों तक को त्योहार पर अपनी जेब से पैसे दे देते थे
– इस बार 15 अगस्त को स्कूल आने से पहले रो पड़े:
“गाड़ी में तेल डालने तक के पैसे नहीं हैं…”
सुनते ही कई साथी शिक्षक भावुक हो गए।
घर में मातम: पत्नी बार-बार बेहोश, बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल
अश्विनी परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे।
राजपूत कॉलोनी में किराये के कमरे में रहते थे।
उनकी मौत के बाद पत्नी लगातार बेहोश हो रही हैं।
बच्चे बिलखते हुए कह रहे हैं—
बेटा ऋषभ: “पापा कहते थे क्रिकेटर बनाऊंगा…”
“एक दिन पहले ही बात हुई थी, उन्होंने कुछ बताया भी नहीं। अब उनका सपना पूरा करूं या घर देखूं, समझ नहीं आ रहा।”
शिक्षक संघ की मांग— परिवार को मुआवजा और सरकारी नौकरी दी जाए
यूपी प्राथमिक शिक्षक संघ के मंडल महामंत्री ओमकार नाथ पासवान ने कहा—
“10 हजार रुपये में गुजारा असंभव है। सरकार सुन नहीं रही। रोज कई शिक्षामित्र मर रहे हैं। अश्विनी के परिवार को मुआवजा और नौकरी दी जाए।”
शिक्षामित्र हरिलाल प्रसाद ने कहा कि प्रदेश में डेढ़ लाख शिक्षामित्र 24 सालों से सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन मानदेय बढ़ाने में सरकार पूरी तरह विफल रही है।
अश्विनी की मौत एक सवाल छोड़ गई— क्या उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्रों का जीवन इतना सस्ता है?
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