जागृत भारत | कानपुर(Kanpur): जनपद के बर्रा निवासी भूपेंद्र सिंह की असल जिंदगी की एक अनोखी और साहसिक घटना अब फिल्मी पर्दे पर उतर आई है। साइबर ठग को उसी के जाल में फंसाकर उससे 10 हजार रुपये ठगने वाले भूपेंद्र की कहानी पर उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक लघु फिल्म तैयार की है। इस फिल्म का उद्देश्य लोगों को साइबर ठगी के प्रति जागरूक करना है।
नाना पाटेकर बने जागरूक नागरिक की आवाज
इस लघु फिल्म में दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर ने मुख्य भूमिका निभाई है। उनके साथ अभिनेत्री किशोरी सोनी और अभिनेता आदिल ईरानी भी अहम किरदारों में नजर आए हैं। फिल्म का निर्देशन राजा शांडिल्य ने किया है। फिल्म में यह स्पष्ट संदेश दिया गया है कि कोई भी सरकारी एजेंसी कभी भी डिजिटल अरेस्ट नहीं करती और न ही वीडियो कॉल पर वारंट भेजती है।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी, भूपेंद्र ने ऐसे पलटा खेल
बीते वर्ष छह मार्च को भूपेंद्र सिंह के पास एक अनजान नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताते हुए कहा कि भूपेंद्र इंटरनेट पर आपत्तिजनक सामग्री देखते हैं और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज है। आरोपी ने डर दिखाकर मामला रफा-दफा करने के बदले 16 हजार रुपये की मांग की।
जागरूकता बनी हथियार, ठग खुद ठगा गया
भूपेंद्र ने सूझबूझ दिखाते हुए अपनी असली पहचान छिपाई और खुद को इंटर का छात्र बताया। उन्होंने ठग से कहा कि उनके पास पैसे नहीं हैं, लेकिन एक सोने की चेन गिरवी रखी है, जिसे छुड़ाने के लिए तीन हजार रुपये चाहिए। लालच में आकर साइबर ठग ने तुरंत उनके खाते में पैसे ट्रांसफर कर दिए। इसी तरह अलग-अलग बहाने बनाकर भूपेंद्र ने उससे कुल 10 हजार रुपये ऐंठ लिए।
जब ठग को लगा ठगी का एहसास
कुछ देर बाद साइबर ठग को समझ आ गया कि वह खुद ठगा जा चुका है। इसके बाद उसने भूपेंद्र से पैसे वापस करने की गुहार लगानी शुरू कर दी, लेकिन तब तक भूपेंद्र उसे सबक सिखा चुके थे। यह घटना साइबर अपराध के खिलाफ जागरूकता की एक मिसाल बन गई।
यूपी पुलिस का संदेश: जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार
उत्तर प्रदेश पुलिस का कहना है कि साइबर अपराध से बचाव का सबसे बड़ा उपाय जागरूकता है। यही कारण है कि इस फिल्म के माध्यम से आम लोगों को बताया जा रहा है कि सरकारी एजेंसियां कभी फोन या वीडियो कॉल के जरिए गिरफ्तारी या जुर्माने की मांग नहीं करतीं।
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