जागृत भारत | नई दिल्ली(New Delhi): इंडिगो एयरलाइन के संकट ने देश की हवाई परिवहन व्यवस्था को झकझोर कर रख दिया है। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का हाल इन दिनों किसी रेलवे प्लेटफॉर्म जैसा है। कोई परीक्षा देने जा रहा था, कोई पहली बार अकेले सफर पर निकला था, तो कोई अपनी मासूम बच्ची को गोद में लेकर घंटों लाइन में खड़ा है। उड़ानें रद्द, टिकटों के दाम आसमान पर और यात्रियों की रातें एयरपोर्ट की कुर्सियों पर कटने को मजबूर। हालात इस कदर बिगड़े कि कई रूट्स पर किराया लगभग 120 फीसदी तक बढ़ गया और लोग गुस्से में सरकार से मदद की गुहार लगाने लगे।
तीन साल की बच्ची संग घंटों लाइन में खड़ी रहीं पूजा
नागपुर के दंपती पूजा और उत्कर्ष अपने तीन साल की बेटी के साथ हिमाचल से लौट रहे थे, जब रात 12:55 पर दिल्ली उतरने के बाद उन्हें अगली सुबह की फ्लाइट पकड़नी थी। लेकिन कुछ ही देर में मैसेज आया—फ्लाइट कैंसल। तीन घंटे तक बच्ची को गोद में लिए वे लाइन में खड़ी रहीं। अंततः पति और पत्नी को अलग-अलग समय की दो फ्लाइटें मिलीं, पर सुबह फिर सूचना मिली—पति की फ्लाइट भी कैंसल। अब उन्हें 8 दिसंबर की फ्लाइट दी जा रही है। पूजा ने थककर कहा, “यह यात्रा नहीं, परीक्षा बन गई है।”
परीक्षा का भविष्य दांव पर
चंडीगढ़ में परीक्षा देने वाली छात्रा अनुष्का अपने परिवार संग दो दिनों से दिल्ली एयरपोर्ट पर है। तिरुपति से आई फ्लाइट के बाद वे चंडीगढ़ जाने वाली उड़ान के लिए तैयार थे, लेकिन फ्लाइट लगातार कैंसल होती गई। मजबूर पिता ने कहा, “बेटी की परीक्षा है, अब बस या कैब से जाना ही पड़ेगा। फ्लाइट का भरोसा नहीं बचा।”
पहली फ्लाइट का रोमांच… अब चिंता का बोझ
हरियाणा के पानीपत में रहने वाले अब्दुल्ला अपनी पत्नी हिनूल के अकेले पहले सफर को लेकर चिंतित बैठे हैं। पत्नी की फ्लाइट सात घंटे लेट है। अब्दुल्ला बोले, “एक गिलास पानी तक नहीं मिला, सुबह से यहीं बैठा हूं। सोचकर डर लगता है वो अकेली कैसे मैनेज कर रही होगी।”
भूखे-प्यासे यात्री, बैठने को जगह तक नहीं
रातभर एयरपोर्ट पर रुके लोग कहते हैं—“न समय की जानकारी, न मदद करने वाला स्टाफ।” महिलाओं ने बताया कि छोटे बच्चों को ठंड और अव्यवस्था में संभालना किसी तपस्या से कम नहीं। एक मां ने कहा, “हमें लगा था एयरपोर्ट जा रहे हैं, रेलवे प्लेटफॉर्म नहीं। अगर पता होता चादर लेकर आते, बच्चे को तो आराम मिलता।”
टिकट महेंगे और रिफंड नाम मात्र—कहां जाएं यात्री?
एक यात्री उत्कर्ष ने बताया कि टिकट कैंसिल करने पर 12,000 में से सिर्फ 2,000 रुपये रिफंड मिल रहा है। दूसरी फ्लाइट की कीमत दोगुनी। “उधर जाना भी मुश्किल और यहां फंसकर इंतज़ार भी बेबसी—हम अधर में अटके हुए हैं।”
एयरपोर्ट पर बढ़ा परिचालन संकट, टिकट दाम बने अंतरराष्ट्रीय
इंडिगो की खराब संचालन व्यवस्था के कारण घरेलू रूट्स में टिकटों की कीमतों ने रिकॉर्ड तोड़ उछाल मारा। हालत यह कि कुछ घरेलू टिकटों का खर्च लंदन के रिटर्न टिकट से भी अधिक दिखा। एयर इंडिया और स्पाइसजेट ने भी बढ़ी मांग का फायदा उठाकर किराए बढ़ा दिए।
सरकार का हस्तक्षेप, ‘फेयर कैप’ से मिलेगी राहत
सरकार ने स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए किराया सीमा तय कर दी है ताकि अचानक बढ़ाए दामों को तुरंत रोका जा सके। उम्मीद है कि इससे यात्रियों पर बोझ कम होगा और कीमतें सामान्य होंगी।
ऑपरेशनल कारण, टेक्निकल खामियां और सूचनाओं की कमी—यही है जड़ समस्या
डीजीसीए की 2024 रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक साल में करीब 2,900 उड़ानें विभिन्न कारणों से रद्द हुईं। मौसम, स्टाफ की कमी और तकनीकी समस्याएं इसका बड़ा कारण हैं। इंडिगो ने भी इन्हीं वजहों का हवाला दिया है। लेकिन यात्रियों को समय पर जानकारी नहीं मिलना सबसे बड़ा संकट बन गया है।
यात्रियों की पीड़ा—कब तक चलेगा ये ‘हवाई जाम’?
दिल्ली एयरपोर्ट हर यात्री की बेबसी की कहानी कह रहा है। उम्मीदों से भरी आंखें अब थक चुकी हैं। ठंड, थकान और भूख के बीच लोग बस यही सवाल पूछ रहे हैं—
“सफर कब आगे बढ़ेगा?”
सात समुंदर पार से आई दुल्हन: मैनपुरी के बेवर में पली प्रेम कहानी, मैक्सिको की एस्मेरल्डा ने हिंदू रीति-रिवाज से रचाई शादी
➤ You May Also Like

























































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































