जागृत भारत | लखनऊ/हरदोई(Lucknow/Hardoi): देशभर में बढ़ रही साइबर ठगी की घटनाओं के बीच उत्तर प्रदेश का हरदोई जिला राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि पिछले कुछ वर्षों में देशभर में हुई कई ऑनलाइन ठगी में हरदोई से जारी 99 मोबाइल नंबरों और कई स्थानीय बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया। इनमें से अधिकांश मोबाइल सिम उन्हीं लोगों के नाम पर जारी हुए जो यह जानते तक नहीं कि उनके नाम से जारी नंबर अपराधियों के हाथों में पहुँच चुके हैं। पुलिस और साइबर विशेषज्ञ अब इसे एक संगठित नेटवर्क मान रहे हैं, जिसकी जड़ें हरदोई, शाहजहांपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों तक फैली हुई दिखाई दे रही हैं।
जांच में सामने आया: 99 सिम एक ही पॉस कोड से जारी, कई ग्रामीणों को पता ही नहीं कि उनके नाम पर कितने सिम जारी हुए
रेलवेगंज चौकी प्रभारी विश्वास शर्मा की प्रारंभिक जांच में पता चला कि साइबर ठगी में जिस 99 मोबाइल नंबर का इस्तेमाल किया गया, वे सभी एक ही पॉइंट ऑफ सेल (POS) कोड से जारी हुए थे। यह POS कोड हरदोई के सिविल लाइन निवासी आशुतोष गुप्ता के नाम पर जारी हुआ था।
जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2023 में ग्रामीण क्षेत्रों से आधार और अंगूठा लगाकर आए लोग एक सिम खरीदकर लौट जाते थे, लेकिन उनकी जानकारी के बिना उन्हीं की ID पर दो अतिरिक्त सिम जारी कर दिए जाते थे।
इन्हीं अतिरिक्त सिम कार्डों को बाद में साइबर अपराधियों ने कब्जे में ले लिया और देशभर में ठगी के नेटवर्क में उपयोग किया।
आशुतोष गुप्ता के खिलाफ FIR, साइबर ठगों का बड़ा नेटवर्क बेनकाब होने की तैयारी
पुलिस ने आशुतोष गुप्ता के खिलाफ फर्जीवाड़ा और आईटी एक्ट के तहत शहर कोतवाली में FIR दर्ज कर ली है। अधिकारियों के अनुसार यह सिर्फ शुरुआत है और गिरफ्तारी होते ही एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश संभव है।
सीओ सिटी अंकित मिश्रा ने पुष्टि की —
“आशुतोष गुप्ता के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। उसकी गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं। टीमें गठित कर पूरे गिरोह का खुलासा किया जाएगा।”
शाहजहांपुर से जारी हुआ था POS कोड, सभी 99 नंबर BSNL के
पुलिस विवेचना में पता चला कि POS कोड शाहजहांपुर से जारी हुआ था और साइबर ठगी में उपयोग किए गए सभी सिम BSNL के थे। 2023 और 2024 में एक बार के KYC पर एक साथ तीन सिम तक जारी करने की अनुमति थी, जिसका बड़े पैमाने पर दुरुपयोग हुआ।
ग्रामीण लोग एक सिम खरीदते, लेकिन अपराधी तीनों सिम ले जाते—और यही बना देशभर में फैली ठगी की सबसे बड़ी वजह।
हरदोई के बैंक खातों में पहुंचा ठगी का पैसा — छह बड़े केसों में पुष्टि
हरदोई के कई थाना क्षेत्रों—सवायजपुर, पिहानी, टड़ियावां और पाली—के बैंक खातों को ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए उपयोग किया गया। नीचे प्रमुख मामलों का विस्तार:
केस 1
सत्य प्रकाश (जिलगांव), दो बैंक खातों में पहुँचे ₹19,000
मुंबई निवासी विक्रम नारेंद्र से ₹19,000 की ठगी की गई। दस हजार रुपये बैंक ऑफ बड़ौदा और नौ हजार इंडियन ओवरसीज बैंक में पहुंचे। सिम आदर्श की ID पर जारी था।
केस 2
ओम राज (कन्हारी), नागपुर निवासी पंकज से ₹1,000 की ठगी
पीड़ित पंकज ने महाराष्ट्र में शिकायत दर्ज कराई। ठगी की रकम ओम राज के बैंक ऑफ बड़ौदा खाते में मिली।
केस 3
आदर्श (मिश्रनपुरवा), मेरठ से लेकर गाजीपुर तक ठगी का बड़ा नेटवर्क
भारत ग्रोवर (मेरठ) से ₹6,500 की ठगी। गाजीपुर निवासी कैलाश यादव से ₹45,000 की ठगी। आदर्श के बैंक ऑफ इंडिया और एयरटेल पेमेंट बैंक के खातों में कुल ₹51,850 पहुँचे।
केस 4
सुधीर कुमार व राजेश, दोनों ने ठगी के लिए ही खाते खुलवाए
बैंक खाते में ₹3,300 आए और पुलिस ने तुरंत लेनदेन पर रोक लगाई।
केस 5
शशिराजन के खातों में राजस्थान और बंगाल की ठगी की रकम पहुँची
राजस्थान (श्रीगंगानगर) से ₹5,000 पश्चिम बंगाल (जुमजुम खातून) से ₹1,030 सभी रकम शशिराजन के नाम से जारी खातों में पहुँची।
केस 6
कृष्ण पाल के खाते में हुगली से पहुँचे ₹1,000
पश्चिम बंगाल के हुगली निवासी संदीप बेरा ने साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराई। ठगी की राशि कृष्ण पाल के खाते में आई पाई गई।
जांच एजेंसियों की नज़र अब पूरे नेटवर्क पर — हरदोई बना साइबर ठगी का हब?
पुलिस का मानना है कि यह सिर्फ 99 सिम और कुछ बैंक खातों का मामला नहीं है, बल्कि इससे बड़ा एक संगठित राष्ट्रीय नेटवर्क हरदोई को आधार बनाकर काम कर रहा था। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियाँ तथा खुलासे संभव हैं।
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