जागृत भारत | गोरखपुर(Gorakhpur): यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के आह्वान पर सरकारी बैंक कर्मचारियों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल का गोरखपुर में व्यापक असर देखने को मिला। पांच दिवसीय कार्य सप्ताह सहित अन्य मांगों को लेकर हुई इस हड़ताल के चलते जिले के लगभग सभी सरकारी बैंक बंद रहे। दिनभर बैंक शाखाओं पर ताले लटके रहे, जिससे ग्राहकों और व्यापारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। अनुमान के मुताबिक जिले में करीब 500 करोड़ रुपये से अधिक का बैंकिंग कारोबार प्रभावित हुआ। नकदी निकासी, जमा, चेक क्लीयरेंस, ड्राफ्ट, ऋण वितरण, पेंशन भुगतान और सरकारी योजनाओं से जुड़े कार्य पूरी तरह ठप रहे।
बाजार और आमजन पर सीधा असर
हड़ताल के कारण शहर और ग्रामीण इलाकों में लेनदेन सुस्त पड़ गया। बैंक शाखाओं के बाहर सुबह से ही ग्राहकों की भीड़ लगी रही, लेकिन काम न होने पर उन्हें मायूस लौटना पड़ा। व्यापारी वर्ग को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ा, क्योंकि चेक क्लीयरेंस और बैंकिंग ट्रांजैक्शन रुकने से कई कारोबारी सौदे अटक गए। एटीएम में सीमित नकदी होने से लंबी कतारें देखने को मिलीं, कई एटीएम खाली भी मिले। दूरदराज गांवों से आए लोगों को बिना काम के वापस लौटना पड़ा। पेंशनधारकों और दैनिक जरूरतों के लिए बैंकिंग सेवाओं पर निर्भर लोगों को भी गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
बैंक कर्मियों का प्रदर्शन और रैली
यूएफबीयू के बैनर तले बैंक कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा से विजय चौक और गोलघर होते हुए रैली निकाली गई, जो वापस एसबीआई मुख्य शाखा पर सभा में बदल गई। कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मांगों को जल्द पूरा करने की अपील की।
पांच दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग प्रमुख
यूएफबीयू के संयोजक यूपीएन सिंह ने कहा कि जब देश के अधिकांश सरकारी और निजी विभागों में पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू है, तो बैंक कर्मियों को इससे वंचित रखना अन्याय है। उन्होंने बढ़ते काम के दबाव और जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत बताई।
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया स्टाफ एसोसिएशन के उप महामंत्री राहुल कुमार गुप्ता ने कहा कि जनधन, मुद्रा और स्टैंड अप इंडिया जैसी योजनाओं को सफल बनाने में बैंक कर्मियों की अहम भूमिका रही है। नोटबंदी और कोरोना महामारी जैसे संकट काल में भी कर्मचारियों ने जोखिम उठाकर सेवाएं दीं।
पंजाब नेशनल बैंक अधिकारी संघ के अध्यक्ष दीनबंधु पांडे ने कहा कि बढ़ता कार्यभार और लंबे कार्य घंटे कर्मचारियों के निजी जीवन को प्रभावित कर रहे हैं। समस्याओं की अनदेखी के चलते कर्मचारियों को हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा।
नकदी संकट से बढ़ी लोगों की परेशानी
हड़ताल का असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर साफ दिखा। पेंशनधारकों, छोटे व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों को बैंकिंग सेवाओं के ठप होने से आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा। कई लोगों को जरूरी भुगतान टालना पड़ा, जिससे असंतोष और चिंता का माहौल बना रहा।
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