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गाजियाबाद में सत्यापन अभियान के दौरान पुलिस अधिकारी का कथित दुर्व्यवहार, वायरल वीडियो के बाद सख्त चेतावनी

Published on: January 4, 2026
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जागृत भारत | गाजियाबाद(Ghaziabad): पुलिस ने कौशांबी थाना प्रभारी को उस समय सख्त चेतावनी जारी की, जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। वीडियो में थाना प्रभारी कथित तौर पर एक झुग्गी बस्ती निवासी से उसकी नागरिकता को लेकर पूछताछ करते और उसे डराते नजर आ रहे हैं। यह घटना 2 जनवरी 2026 की बताई जा रही है।

वायरल वीडियो में क्या दिखा

वायरल वीडियो में पुलिस अधिकारी एक व्यक्ति की पीठ पर मोबाइल फोन जैसा उपकरण रखकर उससे पूछते दिखाई दे रहे हैं कि वह बांग्लादेशी है या नहीं। अधिकारी वीडियो में कहते सुनाई दे रहे हैं—
“मशीन लगाओ… मशीन बता रही है कि तुम बांग्लादेशी हो, है ना?”

इस पर व्यक्ति खुद को बिहार के अररिया जिले का निवासी बताता है। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए।

पुलिस जांच में क्या सामने आया

गाजियाबाद पुलिस के अनुसार, यह वीडियो कौशांबी थाना क्षेत्र में चल रहे एरिया डोमिनेशन अभियान का है। इस अभियान के तहत अस्थायी बस्तियों और झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से पूछताछ और सत्यापन किया जा रहा था।

इंदिरापुरम के सहायक पुलिस आयुक्त अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि मामले की जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि

  • अभियान का उद्देश्य नागरिकता सत्यापन नहीं था

  • यह एक रूटीन सुरक्षा अभ्यास का हिस्सा था

हालांकि, पुलिस ने माना कि थाना प्रभारी का व्यवहार अनुचित था, जिसके चलते उन्हें भविष्य में ऐसा आचरण न दोहराने की कड़ी चेतावनी दी गई है। पूरे मामले के तथ्यों की गहन जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जा रही है।

एरिया डोमिनेशन अभियान क्या होता है

गाजियाबाद पुलिस ने स्पष्ट किया कि एरिया डोमिनेशन अभियान का उद्देश्य

  • कानून-व्यवस्था बनाए रखना

  • संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना

  • अपराध की रोकथाम करना

  • आम जनता में सुरक्षा की भावना मजबूत करना

इन अभियानों के तहत सघन गश्त, रूट मार्च और संवेदनशील इलाकों में चेकिंग की जाती है।

विपक्ष का हमला, न्यायिक हस्तक्षेप की मांग

इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस पार्टी ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि

“राज्य पुलिस और प्रशासन से किसी कार्रवाई की उम्मीद नहीं है, क्योंकि निर्देश ऊपर से आते हैं। उत्तर प्रदेश में ऐसे मामले अब रोजमर्रा की बात हो गए हैं। हाईकोर्ट को इस मामले में स्वतः संज्ञान लेना चाहिए। यह न केवल कानून के शासन का उल्लंघन है, बल्कि राज्य की छवि को भी नुकसान पहुंचाता है।”

वायरल वीडियो के बाद गाजियाबाद पुलिस ने स्थिति स्पष्ट करते हुए संबंधित अधिकारी को चेतावनी दी है, लेकिन यह मामला पुलिस सत्यापन अभियानों की सीमाओं, व्यवहार और जवाबदेही को लेकर एक बार फिर बहस के केंद्र में आ गया है। अब सबकी नजर जांच के बाद होने वाली आगे की कार्रवाई पर टिकी है।

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